नोएडा एसएसपी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख तबादला गिरोह से अवगत कराया

नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सूचित किया है कि उत्तर प्रदेश में एक अच्छी तरह से संगठित ट्रांसफर-पोस्टिंग गिरोह पनप रहा है।

Update: 2020-01-02 19:03 GMT

नोएडा| नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सूचित किया है कि उत्तर प्रदेश में एक अच्छी तरह से संगठित ट्रांसफर-पोस्टिंग गिरोह पनप रहा है। एसएसपी ने बताया कि तबादला कराने की एवज में 50 लाख रुपये से लेकर 80 लाख रुपये तक की बड़ी रकम की पेशकश की जा रही है।

नोएडा एसएसपी वैभव कृष्ण ने गिरोह में शामिल यूपी कैडर के कम से कम पांच भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों के नामों का भी जिक्र किया है।

वैभव कृष्ण ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के नाम लिखे एक गोपनीय पत्र में पांच आईपीएस अधिकारियों की मोबाइल फोन रिकॉर्डिग का खुलासा किया है, जिसमें व्हाट्सएप मैसेज की जानकारी भी शामिल है। इससे पता चलता है कि एसएसपी मेरठ की पोस्ट के लिए एक आईपीएस अधिकारी और एक पावर-ब्रोकर के बीच 80 लाख रुपये में सौदा हुआ।

इस पत्र में लिखा गया है कि मामले की जांच के दौरान जानकारी सामने आई और विभिन्न धाराओं सहित गैंगस्टर अधिनियम के तहत 23 अगस्त 2019 को चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था।

पत्र की पुष्टि करते हुए एसएसपी वैभव कृष्ण ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने पिछले महीने सरकार को ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट में शामिल एक उच्च संगठित गिरोह के बारे में जानकारी दी है।

एसएसपी ने कहा, "एक बार जब मैं इस गिरोह को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया, तो सिंडिकेट मुझे घेरने की कोशिश कर रहा था। हाल ही में उन्होंने मुझे बदनाम करने के लिए तीन अश्लील वीडियो क्लिप प्रसारित की, जिसमें मेरी तस्वीरों को एडिट किया गया है।"

एसएसपी नोएडा द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए सनसनीखेज पत्र में और भी खुलासे हुए हैं। इसमें बताया गया है कि यूपी कैडर के एक अन्य आईपीएस अधिकारी ने एसएसपी आगरा के पद के लिए 50 लाख रुपये की पेशकश की। इसके अलावा एसएसपी बरेली के पद के लिए 40 लाख रुपये की राशि बताई गई। इसी तरह बिजनौर में एसपी पद के लिए 30 लाख रुपये की पेशकश की गई।

पता चला है कि शक्तिशाली नौकरशाहों और राजनेताओं की सांठगांठ से चल रहे इस गिरोह में कुछ पत्रकार भी थे, जिन्होंने सौदे की बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुलिस की साइबर टीम द्वारा विभिन्न फोन वार्तालापों और संदेशों की दोबारा जांच करने पर इनका खुलासा हुआ।

जांच के दौरान साइबर टीम ने आरोपी के मोबाइल फोन से कुछ रिकॉर्ड की गई बातचीत को भी फिर से प्राप्त किया, जो उप्र के बांदा जिले में सक्रिय रैकेट चलाने से संबंधित है।

एसएसपी नोएडा ने हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ अपने पत्राचार के बारे में जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने बताया कि ट्रांसफर-पोस्टिंग रैकेट में शामिल शक्तिशाली सिंडिकेट जांच को रोकने की कोशिश कर रहा है।

उप्र के डीजीपी ओ.पी. सिंह ने आईएएनएस को बताया, "स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हमने नोएडा के बजाए हापुड़ पुलिस को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।"

डीजीपी ने हालांकि एसएसपी नोएडा के पत्र पर कोई टिप्पणी नहीं की।

 

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