कोविड की ट्रांसमिशन चेन ब्रेक करने की आवश्यकता : अमित

उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने सोमवार को कहा कि हमें कोविड की ट्रांसमिशन चेन को ब्रेक करने की आवश्यकता है

Update: 2021-05-03 22:58 GMT

देहरादून। उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी ने सोमवार को कहा कि हमें कोविड की ट्रांसमिशन चेन को ब्रेक करने की आवश्यकता है, इसलिए विभिन्न स्थानों पर कर्फ्यू की अवधि बढ़ाई गयी है।

श्री नेगी ने कहा कि हमारी रणनीति पहले टेस्टिंग, ट्रेसिंग आइसोलेशन, ट्रीटमेंट और वैक्सीनेशन इन पांच चरणों की प्रक्रिया है। कन्टेनमेंट जोन द्वारा हमारी कोशिश यही है कि कोरोना का संक्रमण एक विशेष क्षेत्र में ही रहे, इसका प्रसार न हो। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है। उन्होंने बताया कि 90 प्रतिशत कोरोना संक्रमित आइसोलेशन में ही रह कर ठीक हो रहे हैं। आइसोलेशन में रह रहे मरीजों पर भी निरंतर निगरानी रखी जा रही है।

देहरादून स्थित सचिवालय के मीडिया सेंटर में संवाददाताओं को सम्बोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि 104 कंट्रोल रूम पर 1500 से दो हजार के करीब विभिन्न प्रकार के काॅल आ रहे हैं, जिनमें व्हाट्सएप काॅल और लैंडलाइन काॅल्स भी शामिल हैं। उन्होंने राज्य सरकार के एक और महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुये बताया कि ई-संजीवनी के माध्यम से लोग कहीं से भी चिकित्सकीय परामर्श ले सकते है। इससे हमारे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी लाभ होगा और किसी को अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलना पड़ेगा। साथ ही लोगों को काफी सहूलियत भी रहेगी।

श्री अमित ने बताया कि 45 वर्ष से ऊपर वालों के टीकाकरण के लिये हमारे अनुरोध पर दो लाख डोज पहुंच रही है। भारत सरकार द्वारा इस बारे में हमें कन्फर्म किया गया है। इसी के साथ 1 लाख 20 हजार डोज और पहुंचेगी। इस तरह हमारा वैक्सीनेशन कार्यक्रम सतत चल रहा है। उन्होंने बताया कि गांवों में बाहर से आने वाले होम आइसोलेशन में सही तरीके से रहे, इसकी मानिटरिंग पंचायत राज विभाग द्वारा की जा रही है। प्रधानों को यह जानकारी दी जा रही है कि उनके गांव में कौन से लोग बाहर से आकर ठहरे हैं।

उन्होंने बताया कि युवा कल्याण विभाग को भी इस काम में लगाया गया है। युवक और महिला मंगल दलों का सहयोग भी लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्लाज्मा डोनेशन का भी एक एप शुरू किया गया है। जिसके हम लगभग 95 हजार लोगों को व्हाट्सएप मैसेज भेज चुके हैं। उन्होंने बताया1 इसमें अपील की गई है कि यदि आप कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं तो प्लाज्मा दान कर दूसरों की जान बचाएं। इससे लोग आगे आएंगे और प्लाज्मा डोनेट करेंगे, जिससे कोरोना की रोकथाम में सहायता मिलेगी।

सचिव डाॅ पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि इंजेक्शन रेमडिसिविर का लगातार डिस्ट्रीब्यूशन जारी हैं। भारत सरकार ने हमारा कोटा और बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि आज हम 2000 इंजेक्शन रिसीव कर रहे हैं। जिन अस्पतालों से इसकी मांग आती रहेगी, हम वहां भेजते रहेंगे। हम उस व्यक्ति की भी संपूर्ण जानकारी ले रहे हैं, जिसे रेमडिसिविर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हम क्रास चैक कर रहे हैं कि इंजेक्शन सही व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं।

डॉ. पांडेय ने बताया कि विशेषज्ञों द्वारा किये गये आंकलन में यह तथ्य सामने आया है कि जिनको लक्षण दिखाई दे रहे हैं और उन्होंने टेस्ट नहीं करवाया है, टेस्ट करवाया तो सही समय पर हाॅस्पिटल नहीं आए या उन्होंने समय पर दवाई नहीं ली, जिससे उनका केस गम्भीर हो गया। गम्भीर होने के बाद वे हाॅस्पिटल आ रहे हैं तो आक्सीजन सेचुरेशन 70 प्रतिशत तक या उससे नीचे हो जा रहा है तो मुश्किल हो रही है। उन्होंने अनुरोध किया कि जिसमे भी लक्षण दिख रहे हैं वह कृपया तुरंत दवाई खाना शुरू करे और सैंपल टेस्ट करवाए। समय पर दवाई खाएंगे तो कोरोना गंभीर रूप धारण नहीं करेगा और हम जनता को अन्य परेशानियों से बचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि कुछ जिलों में जहां भी व्यक्ति सैंपल देने जा रहे हैं, हमने वहां दवाई रखवाई है। व्यक्ति को सैंपल देने के साथ वहीं दवाई मिल जाएगी।

डाक्टर पांडेय ने संवाददाताओं से यह जानकारी भी शेयर की कि स्टेराॅइड का अच्छा रोल देखने को मिला है। यह आक्सीजन अचानक कम होने से बचा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे ध्यान में रखकर हम स्टेराॅइड देना भी शुरू कर रहे हैं।

पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अमित सिन्हा ने बताया कि 115 स्थानों पर दबिश दी गई, जिसमें चार मुकदमें दायर और 6 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। एक स्थान पर रेमडिसिविर किसी और के नाम से लेकर किसी और को दी जा रही थी। जिस पर गिरफ्तारी हुई। इसी प्रकार निर्धारित कीमत से अधिक पर आक्सीमीटर बेचने व आरटीपीसीआर टेस्ट करने का मामला भी पकङा गया।

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