इस्लामाबाद : पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे चरण ने हिंसा को और तेज कर दिया है। पिछले पांच दिनों से जारी इस अभियान में दोनों पक्षों की ओर से भारी हताहतों के दावे किए जा रहे हैं। बीएलए के प्रवक्ता ने दावा किया है कि उनके लड़ाकों ने अब तक पाकिस्तानी सेना के 310 सैनिकों को मार गिराया है। वहीं पाकिस्तानी सेना ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में 216 विद्रोहियों को ढेर किया है और अभियान को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया गया है।
‘ऑपरेशन हेरोफ’ क्या है?
बलूच लिबरेशन आर्मी ने ‘ऑपरेशन हेरोफ’ का पहला चरण अगस्त 2024 में शुरू किया था। अब इसका दूसरा चरण पिछले शनिवार से सक्रिय बताया जा रहा है। बलूच भाषा में ‘हेरोफ’ का अर्थ ‘काला तूफान’ होता है, जो इस अभियान की आक्रामक प्रकृति को दर्शाता है। बीएलए लंबे समय से बलूचिस्तान में सक्रिय एक उग्रवादी संगठन है, जो प्रांत की स्वायत्तता और संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण की मांग करता रहा है। संगठन का आरोप है कि संघीय सरकार बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करती है, जबकि स्थानीय लोगों को उसका लाभ नहीं मिलता।
बीएलए के दावे
बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने एक बयान जारी कर कहा कि संगठन के लड़ाके प्रांत के कई इलाकों में सक्रिय रूप से मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर, पुलिस, आतंक रोधी विभाग और सेना समर्थित समूहों को कई क्षेत्रों में दबाव और संचालन संबंधी विफलताओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रवक्ता के अनुसार, शुरुआती आकलनों में यह सामने आया है कि ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे चरण में अब तक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सहयोगी इकाइयों के कम से कम 310 सैनिक मारे गए हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बीएलए के 46 लड़ाके भी इस दौरान मारे गए हैं। बीएलए का कहना है कि उनके हमले रणनीतिक ठिकानों और सुरक्षा बलों की चौकियों पर केंद्रित हैं। संगठन का दावा है कि उन्होंने कई स्थानों पर सुरक्षा बलों के अभियानों को विफल किया है और कुछ इलाकों में अस्थायी नियंत्रण स्थापित किया है।
पाकिस्तानी सेना का पक्ष
दूसरी ओर, पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि उसने बलूचिस्तान में चलाए जा रहे अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। सेना की मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने बताया कि 26 जनवरी से शुरू किए गए अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों पर की गई कार्रवाई में 216 विद्रोहियों को मार गिराया गया। आईएसपीआर के अनुसार, इस अभियान में 22 सैनिकों की जान गई है, जबकि 36 नागरिक भी हिंसा की चपेट में आए। सेना ने दावा किया कि उसने विद्रोहियों के कई ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है और क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है।
हालांकि, बलूचिस्तान के गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने अलग आंकड़े पेश किए हैं। अधिकारी के मुताबिक, हालिया हमलों में 45 सैनिक और 40 नागरिक मारे गए हैं। इससे स्पष्ट है कि विभिन्न स्रोतों के आंकड़ों में उल्लेखनीय अंतर है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष की परिस्थितियों में अक्सर हताहतों के आंकड़े प्रचार युद्ध का हिस्सा बन जाते हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों का मनोबल बनाए रखने के लिए बड़े दावे कर सकते हैं। ऐसे में वास्तविक हताहतों की संख्या का आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
बलूचिस्तान में पुराना संघर्ष
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है। यह प्राकृतिक गैस, खनिज और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बंदरगाह ग्वादर के कारण रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना के चलते भी यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय महत्व का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, स्थानीय समूहों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं में बलूच जनता को पर्याप्त प्रतिनिधित्व और लाभ नहीं मिलता। इसी असंतोष ने समय-समय पर उग्र आंदोलनों और सशस्त्र संघर्ष को जन्म दिया है।
स्थायी समाधान संभव नहीं
पाकिस्तानी सेना ने भले ही अभियान के समापन की घोषणा कर दी हो, लेकिन बीएलए के दावे संकेत देते हैं कि संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यदि विद्रोही संगठन सक्रिय बना रहता है, तो आने वाले दिनों में हिंसा की घटनाएं फिर बढ़ सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। राजनीतिक संवाद, आर्थिक भागीदारी और स्थानीय असंतोष को दूर करने के प्रयास भी उतने ही आवश्यक हैं। फिलहाल, बलूचिस्तान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हताहतों के अलग-अलग दावे और जमीनी स्थिति को लेकर अस्पष्टता यह दर्शाती है कि प्रांत में शांति बहाली की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण है।