पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान: मादुरो की तरह नेतन्याहू को पकड़े अमेरिका

एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि अमेरिका को नेतन्याहू को उसी तरह पकड़ना चाहिए, जैसे हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया।

Update: 2026-01-10 07:49 GMT
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर विवादित बयान दिया है। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा कि अमेरिका को नेतन्याहू को उसी तरह पकड़ना चाहिए, जैसे हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि तुर्किए भी नेतन्याहू को पकड़ सकता है और “पाकिस्तानी इसके लिए दुआ कर रहे हैं।” इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।

टीवी इंटरव्यू में क्या बोले ख्वाजा आसिफ
ख्वाजा आसिफ ने इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू को “मानवता का सबसे बड़ा अपराधी” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि गाजा में फिलिस्तीनियों के साथ जो अत्याचार हुए हैं, वे इतिहास में पहले कभी नहीं देखे गए। आसिफ ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उसे खुला घूमने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जो लोग ऐसे “अपराधियों” का समर्थन करते हैं, उनके बारे में कानून क्या कहता है। इस बयान को कई लोगों ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और उसके नेतृत्व की ओर इशारा माना।

एंकर ने रोका इंटरव्यू, वायरल हुई क्लिप
यह इंटरव्यू पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और एंकर हामिद मीर द्वारा लिया जा रहा था। जैसे ही आसिफ की टिप्पणी और तीखी होती गई, हामिद मीर ने इसे “संवेदनशील” करार देते हुए बीच में ही रोक दिया। जब मीर ने पूछा कि क्या वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के संदर्भ में बात कर रहे हैं, तो माहौल और तनावपूर्ण हो गया। इसके तुरंत बाद एंकर ने शो को ब्रेक पर ले जाने का फैसला किया। इंटरव्यू की यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। समर्थक इसे फिलिस्तीन के पक्ष में कड़ा रुख बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे गैर-जिम्मेदाराना और कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ मान रहे हैं।

फिलिस्तीनी मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख
पाकिस्तान का इजराइल के साथ कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं है। पाकिस्तान शुरू से ही फिलिस्तीन के समर्थन में मुखर रहा है और गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई की आलोचना करता रहा है। पाकिस्तान के ईरान के साथ भी अच्छे संबंध हैं, जो इजराइल का कट्टर विरोधी माना जाता है। ऐसे में ख्वाजा आसिफ का बयान पाकिस्तान की पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप तो दिखता है, लेकिन इसकी भाषा और अंदाज ने इसे विवादास्पद बना दिया है। आसिफ ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) का भी जिक्र किया और कहा कि गाजा में कथित युद्ध अपराधों को लेकर नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट पहले ही जारी किया जा चुका है। हालांकि, इस मुद्दे पर इजराइल और उसके सहयोगी देशों का रुख अलग है।

मादुरो का जिक्र और अमेरिकी कार्रवाई
ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर अमेरिका मादुरो को पकड़ सकता है, तो नेतन्याहू को क्यों नहीं। हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई करते हुए मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेने का दावा किया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, 2 जनवरी की रात चलाए गए एक ऑपरेशन के जरिए मादुरो शासन का अंत कर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कार्रवाई को वेनेजुएला में “लोकतंत्र बहाल करने की दिशा में जरूरी कदम” बताया। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि मादुरो लंबे समय से ड्रग्स और हथियारों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा थे।

न्यूयॉर्क में हिरासत, गंभीर आरोप
अमेरिकी कार्रवाई के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। अमेरिका में उन पर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस पर भी अपहरण और हत्याओं के आदेश देने जैसे आरोपों का दावा किया गया है। अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि दोनों पर मुकदमा चलाया जाएगा।

कूटनीतिक हलकों में चिंता
ख्वाजा आसिफ के बयान ने न केवल सोशल मीडिया बल्कि कूटनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह बयान व्यक्तिगत राय है या सरकार की नीति को दर्शाता है। ख्वाजा आसिफ का यह बयान पाकिस्तान की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नई बहस को जन्म दे चुका है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।

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