ईरान ने किया परमाणु ठिकानों पर अमेरिका-इस्राइल के हमले का दावा, IAEA ने कहा- कोई सबूत नहीं
IAEA में ईरान के राजदूत ने रविवार को दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने नतांज (Natanz) परमाणु सुविधा पर हमला किया है। नतांज ईरान के परमाणु कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां यूरेनियम संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां होती रही हैं।
तेहरान/वियना/पश्चिम एशिया | US Iran War: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है। ईरान ने दावा किया है कि अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी बीच तेहरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल ने उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने अब तक किसी भी परमाणु स्थापना को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं की है। एजेंसी ने स्थिति को “गंभीर” बताते हुए परमाणु सुरक्षा पर बढ़ती चिंता जताई है और संभावित रेडियोलॉजिकल रिसाव के खतरे को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
नतांज परमाणु सुविधा पर हमले का दावा
IAEA में ईरान के राजदूत ने रविवार को दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ने नतांज (Natanz) परमाणु सुविधा पर हमला किया है। नतांज ईरान के परमाणु कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां यूरेनियम संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां होती रही हैं। जब राजदूत से पूछा गया कि किस परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से नतांज का नाम लिया। हालांकि, इन दावों के बावजूद अब तक स्वतंत्र रूप से किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हो सकी है। IAEA ने कहा है कि वह स्थिति की निगरानी कर रही है और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर फिलहाल किसी परमाणु केंद्र को क्षति पहुंचने का ठोस प्रमाण नहीं मिला है।
IAEA प्रमुख का बयान: “स्थिति गंभीर, पर केंद्र सुरक्षित”
IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने सोमवार को एजेंसी के 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में कहा कि अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि ईरान की किसी परमाणु स्थापना को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा, “स्थिति गंभीर जरूर है, लेकिन अब तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर ईरान के परमाणु केंद्र सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं।” ग्रोसी ने यह भी स्पष्ट किया कि एजेंसी को अभी तक रेडिएशन स्तर में असामान्य वृद्धि की कोई पुष्टि नहीं मिली है। इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि हालात संवेदनशील हैं और किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रेडियोलॉजिकल रिसाव की आशंका
IAEA प्रमुख ने चेतावनी दी कि मौजूदा सैन्य तनाव को देखते हुए रेडियोलॉजिकल रिसाव यानी परमाणु विकिरण फैलने की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। यदि किसी परमाणु सुविधा को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो उसके परिणाम बेहद व्यापक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में बड़े शहरों तक को खाली कराने की नौबत आ सकती है। हालांकि फिलहाल ऐसी कोई आपात स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है, लेकिन एजेंसी ने सभी सदस्य देशों को सतर्क रहने और समन्वय बनाए रखने की सलाह दी है। IAEA ने यह भी बताया कि किसी संभावित परमाणु सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आपात तंत्र तैयार रखा गया है।
क्षेत्रीय परमाणु ढांचे पर बढ़ा दबाव
ग्रोसी ने कहा कि पश्चिम एशिया के कई देशों में सक्रिय परमाणु ढांचा मौजूद है, जिससे मौजूदा सैन्य तनाव के बीच जोखिम बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात में चार चालू परमाणु रिएक्टर हैं। जॉर्डन और सीरिया में रिसर्च रिएक्टर संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा बहरीन, इराक, कुवैत, ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में भी सुरक्षा हालात तनावपूर्ण हैं। ऐसे में किसी एक देश में परमाणु ढांचे पर हमला पूरे क्षेत्र के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई और परमाणु बुनियादी ढांचे का संयोजन वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील स्थिति पैदा करता है।
रेडिएशन स्तर सामान्य, निगरानी नेटवर्क अलर्ट पर
IAEA के अनुसार ईरान से सटे देशों में फिलहाल रेडिएशन स्तर सामान्य है। किसी भी देश ने विकिरण के असामान्य स्तर की सूचना नहीं दी है। फिर भी क्षेत्रीय निगरानी नेटवर्क को हाई अलर्ट पर रखा गया है। एजेंसी लगातार सदस्य देशों और संबंधित परमाणु नियामक संस्थाओं के संपर्क में है। ग्रोसी ने कहा कि एजेंसी का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और तथ्यों के आधार पर स्थिति का आकलन करना है, ताकि अफवाहों या गलत सूचनाओं से बचा जा सके।
ईरान के प्रमुख परमाणु केंद्रों की स्थिति
IAEA के अनुसार अब तक बुशेहर परमाणु बिजली संयंत्र, तेहरान रिसर्च रिएक्टर और अन्य परमाणु ईंधन सुविधाओं को किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। एजेंसी ने यह भी बताया कि वह ईरान के परमाणु नियामक अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। हालांकि अभी तक उनकी ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। ग्रोसी ने संवाद बहाल करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी सहयोग और निरीक्षण व्यवस्था ही परमाणु सुरक्षा की गारंटी दे सकती है।
सैन्य तनाव और जवाबी कार्रवाई
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर भी सामने आई, जिसके बाद ईरान ने जवाबी हमलों की घोषणा की। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहे हैं और उसने पश्चिम एशिया में कथित तौर पर अमेरिका-इजरायल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि इन दावों और जवाबी हमलों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से जारी है और स्थिति तेजी से बदल रही है।
परमाणु कूटनीति ही समाधान: IAEA
IAEA प्रमुख ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि सैन्य कार्रवाई से परमाणु जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि परमाणु कूटनीति कठिन जरूर होती है, लेकिन असंभव नहीं। ग्रोसी ने कहा, बातचीत और संवाद ही इस संकट को नियंत्रित करने का सबसे सुरक्षित रास्ता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने की अपील की। उनका कहना था कि यदि सैन्य गतिविधियां परमाणु ढांचे के आसपास जारी रहीं, तो अनजाने में भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
वैश्विक चिंता और अनिश्चित भविष्य
ईरान के 555 लोगों के मारे जाने के दावे और परमाणु ठिकानों पर हमले के आरोपों ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा बाजार, क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु सुरक्षा तीनों पर इस संघर्ष का असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और परमाणु ढांचे पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हमला होता है, तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता पैदा कर सकता है। फिलहाल IAEA की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि परमाणु केंद्र सुरक्षित हैं और रेडिएशन स्तर सामान्य है। लेकिन हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।