ईरान के भीषण पलटवार से सुलग रहा मिडिल ईस्ट, अमेरिका ने अपने नागरिकों को 12 से ज्यादा देश छोड़ने का दिया निर्देश
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट के 12 से ज्यादा देशों को तुरंत छोड़ने का आदेश दिया है। इस संघर्ष में अब तक छह अमेरिकी सैनिक और ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई मारे गए हैं।
वाशिंगटन। इजरायल और अमेरिका के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने के बाद से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाता जा रहा है। इस बीच अमेरिका ने चेतावनी जारी कर मिडिल ईस्ट के 12 से ज्यादा देशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों से कहा है कि वे अभी के अभी वहां से निकल जाएं। यह फैसला ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से बढ़े तनाव को देखते हुए लिया गया है।
इन देशों से तुरंत निकलें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक वीडियो संदेश में अपने लोगों से तुरंत निकलने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस समय सुरक्षा को लेकर बहुत गंभीर खतरे हैं और नागरिकों की जान बचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सरकार ने नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। यह चेतावनी (एडवाइजरी) बहरीन, कुवैत, मिस्र, लेबनान, ईरान, ओमान, इराक, कतर, इजरायल, सऊदी अरब, सीरिया, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देशों के लिए जारी की गई है।
अब तक छह अमेरिकी सैनिक की मौत
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि इस संघर्ष में अब तक छह अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इनमें से दो सैनिकों के शव हाल ही में उस जगह से मिले हैं जहां ईरान ने शुरुआती हमले किए थे। अभी भी बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान जारी हैं। मारे गए सैनिकों की पहचान अभी गुप्त रखी गई है।
हेल्पलाइन नंबर जारी
विदेश मंत्रालय की कांसुलर अफेयर्स की सहायक सचिव मोरा नामदार ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों को उपलब्ध व्यावसायिक उड़ानों या अन्य साधनों से निकलने की कोशिश करनी चाहिए। यदि सहायता की जरूरत हो तो वे 24/7 हेल्पलाइन नंबर +1-202-501-4444 (विदेश से) या +1-888-407-4747 (अमेरिका और कनाडा से) पर संपर्क कर सकते हैं।
लंबे युद्ध के लिए तैयार है अमेरिका
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पत्रकारों से बात करते हुए चेतावनी दी कि अमेरिकी सेना की ओर से सबसे घातक हमले होना अभी बाकी है। उन्होंने साफ किया कि अगला चरण में ईरान में वर्तमान स्थिति से कहीं अधिक भीषण हमले होंगे। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वो अपने टारगेट को प्राप्त करने के लिए लंबे वक्त तक युद्ध जारी रखने के लिए तैयार हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वो किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए तुरंत प्रभावित देशों से निकल जाएं।
कैसे शुरू हुआ संघर्ष?
यह पूरा तनाव 28 फरवरी को शुरू हुआ था। उस दिन अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर मिसाइल हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल साइट्स और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया। इस कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और चार बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई।
ईरान ने किया पलटवार
ईरान ने भी इस हमले का कड़ा जवाब दिया है। उसने इस्राइल समेत पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इससे पूरे इलाके में रहने वाले आम लोगों के लिए खतरा बहुत बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य अभियान अभी जारी रहेगा। ट्रंप का कहना है कि वे ईरान की मिसाइल क्षमता और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।