बांग्लादेश में नई सरकार के बाद सेना में बड़ा फेरबदल, शीर्ष पदों पर नियुक्तियां बदलीं, खुफिया एजेंसी और विदेश तैनाती में भी बदलाव

सेना मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों के तहत कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस कदम को नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सैन्य ढांचे में संतुलन स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

Update: 2026-02-24 04:55 GMT

ढाका। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों के भीतर सेना के शीर्ष स्तर पर व्यापक फेरबदल किया गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों के तहत कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस कदम को नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सैन्य ढांचे में संतुलन स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनूर रहमान बने नए सीजीएस

फेरबदल के तहत लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनूर रहमान को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड (एआरटीडीओसी) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के पद पर तैनात थे। सीजीएस का पद बांग्लादेश सेना में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो संचालन, योजना और सामरिक समन्वय की जिम्मेदारी संभालता है। मैनूर रहमान की नियुक्ति को सेना के प्रशिक्षण और सिद्धांत आधारित ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर बदले

फेरबदल के तहत प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल एस एम कमरुल हसन को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह हाल ही में पदोन्नत लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुश्फिकुर रहमान को नियुक्त किया गया है। कमरुल हसन को विदेश मंत्रालय से संबद्ध किया गया है और संभावना जताई जा रही है कि उन्हें किसी महत्वपूर्ण देश में राजदूत के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। सैन्य अधिकारियों को कूटनीतिक भूमिकाओं में भेजने की परंपरा बांग्लादेश में पहले भी देखी गई है, जिसे सामरिक और राजनयिक संबंधों को संतुलित करने की रणनीति माना जाता है।

डीजीएफआई में भी बदलाव

सैन्य खुफिया एजेंसी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (डीजीएफआई) में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को एजेंसी का नया महानिदेशक नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वह सेना मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर कार्यरत थे और पदोन्नति के बाद नई जिम्मेदारी संभालेंगे। डीजीएफआई बांग्लादेश की प्रमुख खुफिया एजेंसी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद निरोध और रणनीतिक सूचनाओं के विश्लेषण का काम करती है। ऐसे में इस पद पर बदलाव को खास महत्व दिया जा रहा है।

भारत स्थित रक्षा सलाहकार को वापस बुलाया गया

भारत स्थित बांग्लादेश उच्चायोग में रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को वापस बुला लिया गया है। उन्हें एक इन्फैंट्री डिवीजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग और सीमाई सुरक्षा मुद्दों पर संवाद जारी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियुक्ति का उद्देश्य सैन्य संचालन में अनुभवी नेतृत्व को प्राथमिकता देना हो सकता है।

इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल में भी बदलाव

सिर्फ सेना ही नहीं, बल्कि न्यायिक ढांचे में भी बदलाव देखने को मिला है। बांग्लादेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के वकील मोहम्मद अमीनुल इस्लाम को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) का प्रमुख अभियोजक नियुक्त किया है। अब तक इस पद पर कार्यरत मोहम्मद ताजुर इस्लाम की नियुक्ति रद्द कर दी गई है। वह पांच सितंबर, 2024 से इस पद पर थे। आईसीटी बांग्लादेश के लिए संवेदनशील संस्थान है, जो 1971 के युद्ध अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करता है। ऐसे में प्रमुख अभियोजक के पद पर बदलाव को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजधानी में बीएनपी नेता को गोली, जांच जारी


राजनीतिक परिदृश्य में भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कालाबागान वार्ड-16 के संयुक्त महासचिव शफीकुर रहमान (55) को राजधानी ढाका के कालाबागान इलाके में रविवार देर रात गोली मार दी गई। उन्हें तत्काल ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। गोली उनके बाएं हाथ में लगी है। हमलावरों की पहचान और हमले के कारणों की जांच की जा रही है। एक अन्य घटना में बीएनपी कार्यकर्ता गयासुद्दीन रासेल ने आरोप लगाया है कि जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों ने उन पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य पर असर


नई सरकार के गठन के तुरंत बाद सेना और न्यायिक तंत्र में इस तरह के व्यापक फेरबदल को सरकार की शक्ति संरचना को पुनर्गठित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य और खुफिया एजेंसियों में बदलाव का सीधा असर देश की आंतरिक सुरक्षा, विदेश नीति और राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। वहीं, राजधानी में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि देश में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अभी भी तीव्र बनी हुई है।

नई सरकार के शुरुआती कदम

सरकार की ओर से इन नियुक्तियों और बदलावों पर विस्तृत आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इन फेरबदल का प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव किस प्रकार सामने आता है। फिलहाल, बांग्लादेश में नई सरकार के शुरुआती कदमों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि सत्ता संभालते ही उसने सैन्य और संस्थागत ढांचे में व्यापक बदलाव का रास्ता चुना है। देश और क्षेत्रीय राजनीति पर इन निर्णयों के दूरगामी प्रभावों पर नजर बनी रहेगी।

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