वॉशिगटन / नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए वैश्विक टैरिफ आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारत पर अब अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत का अमेरिकी टैरिफ लागू होगा। यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों को रद्द किए जाने के बाद सामने आया है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नया 10 प्रतिशत शुल्क उन IEEPA आधारित टैरिफ की जगह लेगा, जिन्हें हाल ही में अदालत ने अवैध करार दिया था। इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक नया मोड़ आया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई रणनीति
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा था कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। अदालत के इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को नए कानूनी आधार की तलाश करनी पड़ी। इसी क्रम में राष्ट्रपति ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत एक नया वैश्विक टैरिफ आदेश जारी किया। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को भुगतान संतुलन (Balance of Payments) से जुड़ी गंभीर स्थितियों में अधिकतम 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक का अस्थायी शुल्क लगाने का अधिकार है। भारत सहित कई देशों पर अब 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लागू किया गया है, जिसे प्रशासन “अस्थायी कदम” बता रहा है।
25% से 18%, अब 10%: कैसे बदली दरें?
इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर एक अंतरिम ढांचे को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर लगने वाले आपसी शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सवाल उठने लगा कि भारत पर लागू 18 प्रतिशत की दर का क्या होगा। जब इस बारे में व्हाइट हाउस से पूछा गया कि क्या भारत की टैरिफ दर अब 18 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगी, तो अधिकारी ने जवाब दिया- “अस्थायी रूप से, हां। जब तक कोई अन्य टैरिफ अथॉरिटी लागू नहीं की जाती, तब तक 10 प्रतिशत की दर प्रभावी रहेगी।” इस बयान से स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल भारत को 10 प्रतिशत का शुल्क देना होगा, लेकिन भविष्य में दरों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
ट्रंप का बयान: “कुछ नहीं बदलेगा”
नए आदेश से कुछ घंटे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि भारत के साथ व्यापार ढांचे में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, “भारत टैरिफ का भुगतान करेगा और हम नहीं। यह एक उचित सौदा है। हमने थोड़ा फेरबदल किया है।” हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने प्रशासन की रणनीति को बदलने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद धारा 122 के तहत नया आदेश लाकर ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ ढांचे को पुनर्संगठित किया।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं टैरिफ?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि आने वाले समय में अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से धारा 232 और 301 का उल्लेख किया। धारा 232 राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ लगाने की अनुमति देती है। धारा 301 अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए इस्तेमाल की जाती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या टैरिफ दरें आगे बढ़ सकती हैं, तो ट्रंप ने कहा, “संभावित रूप से अधिक। यह इस पर निर्भर करता है कि हम उन्हें क्या बनाना चाहते हैं।” इस बयान से साफ है कि वर्तमान 10 प्रतिशत की दर अंतिम नहीं मानी जा सकती।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। एक ओर रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है, तो दूसरी ओर टैरिफ और व्यापार संतुलन को लेकर मतभेद भी सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की तरह है, क्योंकि यह पहले घोषित 18 प्रतिशत से कम है। हालांकि अनिश्चितता बनी हुई है कि भविष्य में कौन-सा कानूनी प्रावधान लागू होगा और दरें किस स्तर तक जा सकती हैं। भारतीय उद्योग जगत की नजर अब इस बात पर है कि क्या दोनों देश स्थायी व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ेंगे या टैरिफ विवाद फिर से उभर सकता है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
नया वैश्विक टैरिफ आदेश केवल भारत तक सीमित नहीं है। यह कई देशों पर समान रूप से लागू किया गया है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, एक समान 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लगाने का अर्थ है कि जिन देशों पर पहले अधिक दरें थीं, उनके लिए अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि, यदि आगे चलकर धारा 232 या 301 के तहत विशिष्ट देशों को निशाना बनाया गया, तो स्थिति बदल सकती है।
अस्थायी राहत या नई शुरुआत?
टैरिफ नीति को लेकर ट्रंप प्रशासन का रुख स्पष्ट रूप से आक्रामक बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद प्रशासन ने वैकल्पिक कानूनी रास्ता अपनाकर अपने आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। भारत के लिए फिलहाल 10 प्रतिशत का शुल्क राहतपूर्ण माना जा सकता है, लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं कहा जा सकता। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम रूप लेता है, तो टैरिफ विवाद काफी हद तक सुलझ सकता है। अन्यथा, कानूनी और नीतिगत बदलावों के साथ दरों में फिर उतार-चढ़ाव संभव है।
नया वैश्विक टैरिफ आदेश
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने तेजी से कदम उठाते हुए नया वैश्विक टैरिफ आदेश जारी किया है। इसके तहत भारत पर फिलहाल 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लागू होगा। हालांकि यह दर पहले घोषित 18 प्रतिशत से कम है, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत भविष्य में बदलाव संभव है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की दिशा आने वाले हफ्तों और महीनों में होने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगी। फिलहाल के लिए भारत को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।