मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, राज्यसभा नामांकन रद्द होने का मामला गरमाया
मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि भाजपा ने हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है।;
गुरुवार को मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी। उन्होंने अवकाशकालीन पीठ के समक्ष दलील दी कि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है और यदि मामले की तुरंत सुनवाई नहीं हुई तो याचिकाकर्ता को प्रभावी राहत पाने के लिए अगले छह वर्षों तक इंतजार करना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई का दिया आश्वासन
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्णय लिया। हालांकि, अदालत ने फिलहाल चुनाव परिणामों की घोषणा पर रोक लगाने संबंधी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
सिंघवी ने अदालत से आग्रह किया था कि अंतिम निर्णय आने तक चुनावी प्रक्रिया के परिणामों को रोका जाए, ताकि याचिकाकर्ता के अधिकार सुरक्षित रह सकें। लेकिन पीठ ने इस चरण में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया।
भाजपा की आपत्ति के बाद खारिज हुआ नामांकन
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की ओर से उठाई गई आपत्तियों के आधार पर निरस्त कर दिया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नहीं दी।
यह आपत्ति पूर्व कॉरपोरेट अधिकारी ए. श्रीलता द्वारा हैदराबाद की अदालत में दायर एक याचिका से जुड़ी है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने एक व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण दिया था, जिस पर छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी जैसे आरोप लगाए गए थे।
कांग्रेस ने बताया राजनीतिक षड्यंत्र
मीनाक्षी नटराजन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें राज्यसभा चुनाव से बाहर करने के उद्देश्य से यह विवाद खड़ा किया गया है।
कांग्रेस नेता ने रिटर्निंग ऑफिसर की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। नटराजन का कहना है कि उनका नामांकन रद्द कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि अदालत का फैसला न केवल मीनाक्षी नटराजन के राजनीतिक भविष्य बल्कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।