‘मुगलों ने शिवाजी महाराज को चूहा कहा था, आज युवाओं को कॉकरोच कहा जा रहा’: उद्धव ठाकरे का केंद्र पर हमला
उद्धव ठाकरे ने जेन-जी युवाओं का समर्थन करते हुए कहा कि जैसे मुगलों ने शिवाजी महाराज को ‘चूहा’ कहा था, वैसे ही आज युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहकर अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने रोजगार, संसद और छात्र आंदोलन पर भी सरकार को घेरा।;
मुंबई में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि आज के युवा देश के भविष्य हैं और उनकी आवाज को दबाने या उनका अपमान करने से लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जाएगा तो उनका आक्रोश स्वाभाविक है।
शिवाजी महाराज और संत ज्ञानेश्वर का दिया उदाहरण
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज और संत ज्ञानेश्वर का उल्लेख करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज ने महज 17 वर्ष की आयु में तोरणा किले पर विजय प्राप्त कर इतिहास रचा था। उन्होंने कहा कि मुगल शासन ने उस समय शिवाजी महाराज को ‘चूहा’ कहकर उनकी क्षमता को कम आंकने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने अपने साहस और नेतृत्व से पूरे साम्राज्य को चुनौती दी।
उन्होंने संत ज्ञानेश्वर का उदाहरण देते हुए कहा कि कम उम्र में ही उन्होंने ‘ज्ञानेश्वरी’ जैसे महान ग्रंथ की रचना की थी। इससे स्पष्ट होता है कि उम्र कभी भी प्रतिभा और नेतृत्व का पैमाना नहीं होती।
युवाओं को कमतर आंकना ठीक नहीं
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने कहा कि वर्तमान समय में 13 से 28 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं को लेकर कई तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। उनका कहना था कि यही पीढ़ी देश के भविष्य का निर्माण करेगी और यदि वे अन्याय या व्यवस्था की खामियों के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो इसे सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज और राजनीति में युवाओं की भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत करती है। इसलिए उनके विचारों और सवालों का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि उनका मजाक उड़ाया जाए।
सांसद बढ़ाने से पहले रोजगार बढ़ाने की जरूरत
उद्धव ठाकरे ने संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा सांसदों को ही सदन में पर्याप्त समय नहीं मिल पाता, तो भविष्य में अधिक सांसदों के लिए व्यवस्था कैसे होगी।
उन्होंने सरकार से रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि देश के युवाओं की सबसे बड़ी जरूरत रोजगार है। सरकार को नई नौकरियां पैदा करने और युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता से काम करना चाहिए।
छात्र आंदोलन की भी सराहना
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने हाल के छात्र आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब लोगों को लगने लगा था कि लोकतांत्रिक आवाज कमजोर पड़ रही है, तब छात्रों और युवाओं ने अपने आंदोलनों के जरिए लोकतंत्र को नई ऊर्जा दी।
उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपने अधिकारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जिस तरह शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाई, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का संकेत है। सरकार को उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए।