आज से शुरू हुई कांवड़ यात्रा: जानिए कब होगा जलाभिषेक, सावन शिवरात्रि की तिथि और सुरक्षा इंतजाम

कांवड़ यात्रा 2026 आज 30 जुलाई से शुरू हो गई। जानिए सावन शिवरात्रि 2026 की तारीख, जलाभिषेक कब होगा, कांवड़ यात्रा रूट, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी दिशानिर्देश।;

Update: 2026-07-30 07:17 GMT

नई दिल्ली। सावन महीने की शुरुआत के साथ ही देशभर में करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व कांवड़ यात्रा 2026 गुरुवार, 30 जुलाई से शुरू हो गया है। उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य पवित्र गंगा घाटों से श्रद्धालु गंगाजल भरकर अपने-अपने शहरों और गांवों के शिवालयों की ओर रवाना हो चुके हैं। पूरे मार्ग पर "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के बीच भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में व्यापक सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था लागू की है।

11 अगस्त को होगा जलाभिषेक, इसी दिन है सावन शिवरात्रि

इस वर्ष कांवड़ यात्रा का समापन 11 अगस्त 2026 को होगा। इसी दिन सावन शिवरात्रि का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। लाखों कांवड़िए अपनी यात्रा पूरी कर इसी दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करेंगे।

क्यों निकाली जाती है कांवड़ यात्रा?

कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। कई भक्त परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, सफलता और मनोकामना पूर्ण होने की कामना से यह यात्रा करते हैं। यात्रा के दौरान श्रद्धालु सात्विक जीवन, अनुशासन और धार्मिक नियमों का पालन करते हुए पूरी आस्था के साथ आगे बढ़ते हैं।

कांवड़ यात्रा के प्रमुख प्रकार

कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से तीन प्रकार की मानी जाती है। साधारण कांवड़ में श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए विश्राम भी करते हैं। डाक कांवड़ में बिना रुके या रिले प्रणाली से यात्रा पूरी की जाती है। वहीं दंडी कांवड़ सबसे कठिन मानी जाती है, जिसमें श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए पूरी दूरी तय करते हैं।

हरिद्वार से दिल्ली तक रहेगा सबसे व्यस्त मार्ग

हरिद्वार से नारसन और पुरकाजी बॉर्डर के रास्ते कांवड़िए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेंगे। इसके बाद मुजफ्फरनगर, खतौली, मेरठ, मोदीनगर, मुरादनगर और गाजियाबाद होते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों की ओर जाएंगे। मेरठ-हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़ और आगरा मार्ग भी इस दौरान अत्यधिक व्यस्त रहेंगे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ट्रैफिक डायवर्जन

कांवड़ यात्रा को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड में 40 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए निगरानी की जा रही है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। कई प्रमुख मार्गों पर वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है ताकि कांवड़ियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।

श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की सलाह

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग का ही उपयोग करने, मौसम की जानकारी लेकर यात्रा शुरू करने, पर्याप्त पानी और आवश्यक दवाइयां साथ रखने तथा शिविरों में ही विश्राम करने की अपील की है। साथ ही तेज आवाज वाले डीजे, भड़काऊ गीतों और हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगाई गई है। कांवड़ मार्ग पर शराब और मांसाहार की दुकानों को भी निर्धारित अवधि तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

श्रद्धा, अनुशासन और सुरक्षा के साथ शुरू हुई कांवड़ यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार व्यवस्थाओं में जुटी हैं। लाखों शिवभक्तों के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि आस्था, संयम और सेवा का भी प्रतीक मानी जाती है।

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