Gen Alpha आंदोलन... फतेहपुर में 24 घंटे में पूरी हुईं अधिकांश मांगें; अब जांच के घेरे में आंदोलन की रणनीति,,

जांच के दौरान छात्रों ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने दिल्ली प्रवास के दौरान जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन देखे थे। वहीं से उन्हें अपने विद्यालय में भी संगठित तरीके से आंदोलन करने की प्रेरणा मिली।;

Update: 2026-07-30 09:57 GMT

फतेहपुर : 74 वर्ष पुराने सर्वोदय इंटर कॉलेज में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन का असर तेजी से देखने को मिला। प्रदर्शन के महज 24 घंटे के भीतर छात्रों की करीब 90 प्रतिशत मांगों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई। वहीं दूसरी ओर प्रशासन और पुलिस ने आंदोलन की पृष्ठभूमि, इसकी योजना और संभावित बाहरी हस्तक्षेप की जांच भी शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन की रूपरेखा कॉलेज के चार छात्रों और दो छात्राओं ने मिलकर तैयार की थी। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों की पहल थी या इसमें बाहरी लोगों की भी कोई भूमिका रही।

जंतर-मंतर से मिली थी आंदोलन की प्रेरणा

जांच के दौरान छात्रों ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने दिल्ली प्रवास के दौरान जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन देखे थे। वहीं से उन्हें अपने विद्यालय में भी संगठित तरीके से आंदोलन करने की प्रेरणा मिली। छात्रों के अनुसार, उन्होंने आपस में चंदा इकट्ठा कर लगभग 300 रुपये जुटाए और खागा तहसील मुख्यालय के पास से बैनर, पोस्टर और तख्तियां तैयार करवाईं। इसके बाद व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से अन्य विद्यार्थियों से संपर्क किया गया और प्रदर्शन की रणनीति बनाई गई।

करीब एक हजार छात्रों ने उठाई थीं बुनियादी सुविधाओं की मांग

मंगलवार को कॉलेज के लगभग एक हजार छात्र-छात्राओं ने परिसर में प्रदर्शन कर पेयजल, साफ-सफाई, बिजली, पंखे और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। छात्रों का कहना था कि लंबे समय से इन समस्याओं की अनदेखी की जा रही थी, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा था। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन छात्रों की बड़ी संख्या और उनकी एकजुटता ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद जिला प्रशासन ने तत्काल विद्यालय की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी।

24 घंटे में शुरू हुआ सुधार कार्य

प्रदर्शन के कुछ ही घंटों बाद प्रशासन ने कॉलेज में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी। बुधवार को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अश्वनी पांडेय और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) राकेश कुमार की निगरानी में कॉलेज में 36 नए पंखे लगाए गए। इसके अलावा 20 और पंखे लगाने की तैयारी की गई। प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था, शौचालयों की सफाई, बिजली आपूर्ति और अन्य आवश्यक संसाधनों को भी प्राथमिकता के आधार पर सुधारने के निर्देश दिए हैं।

जांच में छात्रों की सामाजिक पृष्ठभूमि भी सामने आई

प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अधिकांश छात्र साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। जानकारी के अनुसार, तीन छात्रों के पिता मजदूरी करते हैं, जबकि एक छात्र के पिता का निधन हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की पारिवारिक स्थिति और उनकी वास्तविक मांगों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि पूरे मामले का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।

विद्यालय प्रबंधन को नोटिस, जवाब तलब

जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन यह जानना चाहता है कि यदि कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, तो समय रहते आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता है, लेकिन आंदोलन की पूरी पृष्ठभूमि की भी जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

प्रबंधन ने माना छात्रों की मांगें जायज

विद्यालय के प्रबंधक निखिल अग्निहोत्री ने स्वीकार किया कि छात्रों द्वारा उठाई गई अधिकांश मांगें उचित हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज में शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, अतिरिक्त पंखों की व्यवस्था, फर्नीचर, भवन की मरम्मत और खेल मैदान जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विद्यालय में शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी निर्देश

फतेहपुर जिला प्रशासन ने इस घटना को केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रखा है। जिलाधिकारी ने जिले के सभी सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा करें और जहां कमी हो, वहां तत्काल सुधार सुनिश्चित करें। प्रशासन का मानना है कि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी जाएं तो भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सकता है। वहीं, आंदोलन की जांच पूरी होने के बाद यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह स्वस्फूर्त था या इसके पीछे किसी बाहरी संगठन या व्यक्ति की भी भूमिका थी।
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