सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल ले जाने की मांग फिर हाई कोर्ट पहुंची, पत्नी ने डबल बेंच में दी चुनौती

सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने उन्हें निजी अस्पताल शिफ्ट करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील दायर की। जानिए अदालत में क्या दलीलें दी गईं और स्वास्थ्य बुलेटिन में क्या कहा गया।;

Update: 2026-07-20 04:37 GMT
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 23 दिनों से जारी अनशन के बीच उन्होंने सिंगल बेंच के फैसले को डबल बेंच के समक्ष चुनौती देते हुए सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मांगी है। इससे पहले हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस मांग को खारिज कर दिया था।

डॉ. गीतांजलि का कहना है कि एक सक्षम वयस्क को अपने इलाज और अस्पताल का चुनाव करने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाए।

'इलाज का चुनाव करना मौलिक अधिकार'

डबल बेंच में दायर अपील में गीतांजलि आंग्मो ने कहा है कि सिंगल बेंच के आदेश से सोनम वांगचुक और उनके परिवार के चिकित्सा संबंधी अधिकार प्रभावित हुए हैं। उनका तर्क है कि किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी अस्पताल में उपचार के लिए सीमित नहीं किया जा सकता।

याचिका में कहा गया है कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रखना उनके व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो सरकारी डॉक्टर निजी अस्पताल में भी उनका इलाज और निगरानी जारी रख सकते हैं।

स्वास्थ्य में मामूली सुधार का दावा

इस बीच वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल द्वारा जारी ताजा स्वास्थ्य बुलेटिन में बताया गया कि सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है। डॉक्टरों के अनुसार उनके कुछ रक्त संबंधी मानकों में हल्का सुधार देखा गया है।

अस्पताल प्रशासन ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रही है। लंबे उपवास के कारण उनकी सेहत पर विशेष नजर रखी जा रही है।

हाई कोर्ट ने पहले क्या कहा था?

रविवार को दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि वांगचुक का उचित उपचार किया जा रहा है।

अदालत ने यह भी माना कि उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने का सरकारी निर्णय परिस्थितियों को देखते हुए मनमाना नहीं कहा जा सकता। न्यायालय के अनुसार डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ऐसा कोई संकेत नहीं है कि उनके साथ बलपूर्वक चिकित्सा की जा रही हो।

पत्नी ने जताया सरकारी संस्थानों पर अविश्वास

अदालत के फैसले के बाद डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपने पति को बेहतर सुविधा वाले अस्पताल में उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अदालत में यह भी सुझाव दिया था कि यदि सरकार चाहे तो अपने चिकित्सकों की टीम निजी अस्पताल में भी तैनात कर सकती है।

उन्होंने कहा कि इलाज का चुनाव व्यक्ति का अधिकार है और इसी अधिकार के प्रयोग के लिए अदालत का रुख किया गया है। उनका यह भी कहना था कि देश में कई लोग सरकारी संस्थानों की बजाय निजी चिकित्सा व्यवस्था पर अधिक भरोसा करते हैं और परिवार उसी विकल्प का उपयोग करना चाहता है।

अनशन को लेकर बढ़ी चिंता

सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से शिक्षा व्यवस्था और कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन पर हैं। उनकी सेहत को लेकर लगातार मेडिकल निगरानी की जा रही है। दूसरी ओर, अस्पताल बदलने की मांग अब हाई कोर्ट की डबल बेंच के समक्ष पहुंच गई है, जहां इस मामले पर आगे सुनवाई होने की संभावना है।

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