रियाद/सना: यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता को लेकर पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ी है। पिछले करीब एक दशक में सऊदी अरब, अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इजरायल से जुड़े सैन्य अभियानों और हमलों का सामना करने के बावजूद हूती संगठन ने अपनी गतिविधियां जारी रखी हैं। उसके मिसाइल और ड्रोन हमलों ने लाल सागर के समुद्री मार्गों तथा सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
लाल सागर के रास्ते तेल परिवहन पर असर
हूती की गतिविधियों का सबसे बड़ा असर लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर पड़ रहा है। यह समुद्री मार्ग एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। यहां जहाजों पर हमलों के खतरे के कारण तेल टैंकरों और अन्य वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसका असर समुद्री परिवहन लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। बाब-अल-मंदेब के नजदीक स्थित पेरिम द्वीप का रणनीतिक महत्व भी इस पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बनाता है। हूती की मौजूदगी और गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों की चुनौती
हूती पहले भी सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और अन्य बुनियादी ढांचे को ड्रोन तथा मिसाइलों से निशाना बनाने की क्षमता दिखा चुका है। अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों के जरिए महंगे रक्षा तंत्र को चुनौती देना संगठन की रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। मुसलमानों के पवित्र शहर मक्का की ओर हमले के प्रयास से जुड़ी खबरों ने भी सऊदी सुरक्षा प्रतिष्ठान की चिंता बढ़ाई है। सऊदी अरब के लिए यह सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि धार्मिक और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है।
पहाड़ी इलाकों को बनाया मजबूत ठिकाना
विशेषज्ञों के अनुसार हूती की ताकत का एक महत्वपूर्ण कारण यमन के दुर्गम और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में उसकी मजबूत मौजूदगी है। इन क्षेत्रों में सैन्य ढांचे और हथियारों को छिपाना तथा लंबे समय तक संघर्ष जारी रखना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। रणनीतिक सलाहकार फर्म होराइजन एंगेज के अनुसंधान प्रमुख माइकल नाइट्स के अनुसार, हूती ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों में सबसे प्रतिबद्ध और आक्रामक संगठनों में शामिल है। उनके मुताबिक संगठन ने कुछ सैन्य क्षमताएं अपेक्षाकृत कम समय में विकसित की हैं।
मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हथियारों का इस्तेमाल
हूती के पास बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन होने की बात कही जाती है। संगठन ने लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाने के लिए एंटी-शिप मिसाइलों और नौसैनिक ड्रोन का भी इस्तेमाल किया है। इन हथियारों की क्षमता के कारण हूती यमन से बाहर भी महत्वपूर्ण सैन्य और व्यापारिक ठिकानों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। हालांकि ईरान हूती को हथियार उपलब्ध कराने के आरोपों से इनकार करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और अन्य विश्लेषकों ने इसके बावजूद हूती तथा ईरान के बीच सैन्य संबंधों की ओर संकेत किया है।
2015 के बाद तेजी से बढ़ी संगठन की क्षमता
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक हूती ने अपनी सैन्य और संगठनात्मक क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार किया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2024 तक संगठन में करीब 3.5 लाख लड़ाके भर्ती हो चुके थे, जबकि 2015 में यह संख्या लगभग 30 हजार बताई गई थी। 2015 में सऊदी अरब ने यमन के गृहयुद्ध में हस्तक्षेप किया था और हूती के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया था। इसके बावजूद वर्षों के संघर्ष में संगठन ने अपनी पकड़ बनाए रखी। आज उसके पास ड्रोन, मिसाइल और समुद्री हथियारों का ऐसा मिश्रण है, जो लाल सागर की सुरक्षा से लेकर खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे तक पर दबाव बना सकता है।
पश्चिम एशिया के ऊर्जा संकट से जुड़ा बड़ा सवाल
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है। ऐसे समय में लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में हूती की गतिविधियां वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अतिरिक्त जोखिम के रूप में देखी जा रही हैं। सऊदी अरब के सामने चुनौती यह है कि उसके पास विशाल आर्थिक संसाधन होने के बावजूद मिसाइल और ड्रोन जैसे अपेक्षाकृत सस्ते हथियारों से होने वाले हमलों को रोकने के लिए उसे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पड़ सकती है। फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से सुरक्षा सहयोग की चर्चाएं इसी व्यापक चुनौती के संदर्भ में देखी जा रही हैं।