आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर हाई कोर्ट की दिल्ली पुलिस को फटकार, कहा-पूर्ण प्रतिबंध कैसे लगा सकते हैं?

आरक्षण विरोधी प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से सवाल किए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने भीड़ की आशंका के आधार पर पूर्ण रोक पर सवाल उठाया।;

Update: 2026-09-17 09:41 GMT

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के फैसले पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने क्षत्रिय करणी सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि अगर प्रशासन को भीड़ ज्यादा होने की आशंका है तो उचित शर्तें और पाबंदियां लगाकर प्रदर्शन की अनुमति देने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।

मामला प्रस्तावित प्रदर्शन के साथ-साथ संगठन के कुछ सोशल मीडिया अकाउंट से भी जुड़ा है। करणी सेना की ओर से अधिवक्ता रोशन धनाई ने अदालत को बताया कि संगठन की ओर से दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें एक मेटा, फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप से जुड़े अकाउंट सस्पेंशन को लेकर है, जबकि दूसरी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित है।

पुलिस ने क्यों नहीं दी प्रदर्शन की अनुमति?

सुनवाई के दौरान संगठन की ओर से बताया गया कि पुलिस के एक ACP ने शुरुआत में आवेदन पर अनुमति देने की बात कही थी। बाद में 15 सितंबर को पत्र के जरिए अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। पुलिस की दलील थी कि आयोजकों की ओर से बताई गई संख्या से ज्यादा लोग पहुंच सकते हैं और ऐसी स्थिति में भीड़ को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसी बिंदु पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या केवल ऐसी आशंका के आधार पर प्रदर्शन को पूरी तरह रोकने का फैसला लिया जा सकता है। अदालत ने पहले भी संकेत दिया था कि प्रशासन प्रदर्शन के लिए संख्या, समय और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी उचित शर्तें तय कर सकता है।

दिल्ली पुलिस ने बताई ये वजह

दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी चेतन शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों और जंतर-मंतर की संवेदनशीलता का हवाला दिया। पुलिस ने यह भी कहा कि वहां होने वाले बड़े जमावड़े का असर सेंट्रल दिल्ली के यातायात और अन्य व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़े पोस्ट और लाइक्स के आधार पर संभावित भीड़ का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सोशल मीडिया पर व्यू या लाइक्स की संख्या का मतलब यह नहीं है कि उतने लोग वास्तविक रूप से प्रदर्शन स्थल पर पहुंचेंगे।

क्या दूसरी जगह प्रदर्शन की अनुमति मिल सकती है?

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या स्थान बदलने या कुछ शर्तें लागू करने के बाद प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है। पुलिस की ओर से इस विकल्प पर निर्देश लेकर आने की बात कही गई।

इस मामले की पृष्ठभूमि में पहले भी प्रदर्शन की तारीख और अनुमति को लेकर अदालत में सुनवाई हो चुकी है। सितंबर की शुरुआत में हाईकोर्ट ने पुलिस का पक्ष सुने बिना तत्काल अनुमति देने से इनकार किया था और प्रदर्शन की तारीख बदलने का विकल्प सुझाया था। बाद में 20 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए नए आवेदन पर विचार करने के निर्देश दिए गए थे।

फिलहाल अदालत का मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन के लिए उचित शर्तें तय की जा सकती हैं या किसी आशंका के आधार पर पूर्ण रोक लगाई जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होनी है।

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