पंजाब में फिर साथ आएंगे अकाली दल-भाजपा, मजीठिया के बयान से गठबंधन की अटकलें तेज

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हैं। बिक्रम मजीठिया और हरसिमरत कौर के बयानों से चर्चा बढ़ी।;

Update: 2026-08-21 10:31 GMT

नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा है कि पंजाब की जनता दोनों दलों को फिर एक साथ देखना चाहती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।

मजीठिया ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में अकाली दल और भाजपा के पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों दलों ने लंबे समय तक मिलकर काम किया है। उनके मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने इस राजनीतिक रिश्ते को मजबूत आधार दिया था।

कृषि कानूनों के बाद अलग हुए थे रास्ते

मजीठिया ने कहा कि 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए थे। हालांकि, पंजाब की सामाजिक संरचना, भाईचारे और राज्य की सीमावर्ती स्थिति को देखते हुए लोगों की इच्छा है कि अकाली दल और भाजपा दोबारा साथ आएं।

उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी ओर से गठबंधन को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

हरसिमरत कौर ने भी दिए थे संकेत

मजीठिया के बयान से पहले अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल भी दोनों दलों के बीच संभावित नजदीकी की ओर संकेत कर चुकी हैं। उन्होंने विकास और केंद्र-पंजाब के बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया था।

वहीं, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद भी राजनीतिक चर्चाओं को बल मिला है। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अभी तक आगामी विधानसभा चुनाव के लिए किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है।

1998 में शुरू हुआ था गठबंधन

अकाली दल और भाजपा का गठबंधन करीब दो दशक से ज्यादा समय तक पंजाब की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। अकाली दल 1998 में एनडीए में शामिल हुआ था। दोनों दलों ने मिलकर 2007 से 2017 तक लगातार दो कार्यकाल में पंजाब में सरकार चलाई।

हालांकि, सितंबर 2020 में कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद गहरा गए। हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और बाद में अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया। केंद्र सरकार ने नवंबर 2021 में तीनों कृषि कानून वापस ले लिए थे।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पंजाब में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाएं चर्चा में हैं। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बयानों और बैठकों से यह स्पष्ट हो सकता है कि पुराना गठबंधन वास्तव में फिर आकार लेता है या नहीं।

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