मैड्रिड। Spain housing crisis: स्पेन में बढ़ते आवास संकट ने अब बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। राजधानी मैड्रिड में 87 साल की बुजुर्ग महिला को करीब सात दशक पुराने घर से बेदखल किए जाने की घटना ने देशभर में महंगे किराए और जबरन घर खाली कराने के खिलाफ गुस्सा भड़का दिया। हजारों लोग सड़कों पर उतरे और सरकार पर किराएदारों को राहत देने के लिए तत्काल कदम उठाने का दबाव बढ़ा। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सरकार ने संसद में दो इमरजेंसी बिल पेश किए, लेकिन उन्हें जरूरी समर्थन नहीं मिल सका। संसद में लगातार कमजोर पड़ते समर्थन और आवास संकट पर सरकार के प्रस्तावों के खारिज होने के बाद सांचेज ने तय समय से करीब आठ महीने पहले आम चुनाव कराने का फैसला किया है। स्पेन में 29 नवंबर 2026 को मतदान होगा।
करीब दस साल में लगभग दोगुना हुआ किराया
स्पेन का आवास संकट अचानक पैदा नहीं हुआ है। पिछले कई वर्षों से किराए में लगातार बढ़ोतरी और सीमित उपलब्धता ने खासकर युवाओं और कम आय वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। रियल एस्टेट वेबसाइट आइडियलिस्टा के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में देश में औसत किराया 8.20 यूरो प्रति वर्ग मीटर था। इस साल यह बढ़कर 15.10 यूरो प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, स्पेन में किराए पर रहने वाले करीब 26 प्रतिशत लोग अपनी आय का औसतन 40 प्रतिशत हिस्सा किराए और यूटिलिटी बिलों पर खर्च करते हैं। यूरोपीय संघ में यह औसत करीब 18 प्रतिशत है। ऐसे में बढ़ता किराया बड़ी संख्या में परिवारों के लिए आर्थिक दबाव का कारण बन गया है।
70 साल पुराने घर से निकाली गईं 87 वर्षीय मारिया
विवाद का केंद्र बनीं 87 वर्षीय मारिया डेल कार्मेन अबास्कल। 23 सितंबर को उन्हें मैड्रिड स्थित उस घर से बेदखल कर दिया गया, जहां वह करीब 70 वर्षों से रह रही थीं। अबास्कल परिवार दशकों से इस मकान में किराए पर रह रहा था। मामला तब बिगड़ा जब 2018 में मकान के मूल मालिक ने पूरी इमारत एक रियल एस्टेट कंपनी को बेच दी। इसके बाद किराए को लेकर कंपनी और अबास्कल के बीच विवाद शुरू हुआ। कंपनी ने किराया 500 यूरो से बढ़ाकर 2,650 यूरो कर दिया। वहीं अबास्कल की मासिक पेंशन करीब 1,350 यूरो थी। यानी नया किराया उनकी पूरी मासिक आय से भी काफी अधिक था। बताया गया कि मकान को लंबे समय से रह रही किराएदार से खाली कराने के बाद अधिक मुनाफे वाले पर्यटक अपार्टमेंट के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना थी। मामला अदालत तक पहुंचा और अंततः अबास्कल को घर से बाहर कर दिया गया।
व्हीलचेयर पर बुजुर्ग की तस्वीरों ने बढ़ाया गुस्सा
बेदखली के दौरान पुलिस की मौजूदगी में व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाली अबास्कल की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। टेलीविजन पर इन तस्वीरों के प्रसारित होने के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया। मैड्रिड समेत कई शहरों में महंगे किराए और बेदखली के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे। बाद में अबास्कल अपने घर वापस लौट सकीं। रियल एस्टेट कंपनी और उनके बीच समझौता हुआ और उन्हें वापस घर में रहने की अनुमति मिली। हालांकि, तब तक उनका मामला देश में आवास संकट के खिलाफ आंदोलन का प्रतीक बन चुका था।
सरकार ने पेश किए दो इमरजेंसी बिल
बढ़ते दबाव के बीच सांचेज सरकार ने 29 सितंबर को संसद में किराएदारों को राहत देने के लिए दो इमरजेंसी बिल पेश किए। पहले प्रस्ताव में कमजोर किराएदारों को 2030 तक बेदखली से सुरक्षा देने, किराए में बढ़ोतरी पर कुछ प्रतिबंध लगाने और बड़े निवेशकों द्वारा घर खरीदने पर नियंत्रण जैसे प्रावधान थे। छोटे मकान मालिकों और किराएदारों को टैक्स राहत देने की भी योजना थी। दूसरे प्रस्ताव में मौजूदा किराया समझौतों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था का प्रावधान था। इसका उद्देश्य यह था कि समझौते की अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद किराएदारों को घर खाली करने के लिए मजबूर न किया जाए।
2 अक्टूबर को दोनों प्रस्ताव हुए खारिज
सांचेज सरकार के पास संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं है। इसलिए दोनों विधेयकों को पारित कराने के लिए उसे सहयोगी और विपक्षी दलों का समर्थन चाहिए था। सरकार को उम्मीद थी कि आवास संकट की गंभीरता को देखते हुए अन्य दल इन उपायों का समर्थन करेंगे। लेकिन 2 अक्टूबर को हुए मतदान में दोनों प्रस्ताव पास नहीं हो सके। विरोधी दलों का तर्क था कि मकान मालिकों पर अतिरिक्त नियम लगाने से वे अपने घर किराए पर देने से पीछे हट सकते हैं। इससे किराए के मकानों की उपलब्धता घट सकती है और अंततः किराए में और बढ़ोतरी हो सकती है। जुंत्स ने छोटे मकान मालिकों के हितों को लेकर भी आपत्ति जताई।
सांचेज के सामने कई मोर्चे
आवास संकट के अलावा सांचेज सरकार पहले से ही कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। 2023 के बाद से सरकार नया बजट पारित कराने में भी सफल नहीं रही है। इससे संसद में बहुमत जुटाने की उसकी मुश्किलें साफ दिखाई देती हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रवासन के मुद्दे पर भी विपक्ष सरकार को घेर रहा है। वहीं 2023 में सांचेज सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली कैटेलोनिया की अलगाववादी पार्टी जुंत्स अब कई सरकारी नीतियों का विरोध कर रही है। आवास संबंधी दोनों विधेयकों को समर्थन न मिलने के बाद सरकार की राजनीतिक स्थिति और कमजोर हुई है। ऐसे में सांचेज ने संसद के मौजूदा गतिरोध के बीच जनता के पास जाने का फैसला किया है। अब 29 नवंबर का चुनाव यह तय करेगा कि स्पेन की जनता आवास संकट और सरकार की नीतियों पर किसे अपना समर्थन देती है।