मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तत्काल सुनवाई की मांग

मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। पार्टी ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।;

Update: 2026-06-11 04:36 GMT

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन  (Meenakshi Natarajan) ने अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी चाहती है कि अदालत इस मामले पर शीघ्र सुनवाई कर चुनावी प्रक्रिया में स्पष्टता लाए। यदि सुप्रीम कोर्ट तत्काल सुनवाई के लिए सहमत होता है, तो आगे की कानूनी कार्यवाही का रास्ता तय होगा।

चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद अदालत का रुख

इससे पहले कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला था और नामांकन रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी। हालांकि, पार्टी को वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और कांग्रेस इसे चुनावी निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रही है।

नामांकन रद्द होने की वजह क्या बताई गई?

राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया था। आदेश में कहा गया कि उनके द्वारा जमा किए गए फॉर्म-26 में एक लंबित न्यायिक शिकायत का उल्लेख नहीं किया गया था।

निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, आवश्यक जानकारी का खुलासा नहीं होने के कारण शपथपत्र को अधूरा माना गया और इसी आधार पर नामांकन खारिज किया गया। वहीं कांग्रेस का दावा है कि निर्णय तकनीकी आधार पर लिया गया है और इसकी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।

कांग्रेस ने लगाए राजनीतिक आरोप

कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता Sachin Pilot ने नामांकन रद्द किए जाने को अन्यायपूर्ण बताया और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्षी उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की कोशिश की जा रही है।

विरोध-प्रदर्शन और आगे की रणनीति

नामांकन रद्द होने के विरोध में कांग्रेस नेताओं और विधायकों ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में धरना और भूख हड़ताल आयोजित की। भोपाल में पार्टी नेताओं ने प्रदर्शन कर फैसले को वापस लेने की मांग की।

कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि कानूनी प्रक्रिया से समाधान नहीं निकलता, तो वह राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन तेज करेगी। पार्टी ने जिलों में विरोध कार्यक्रम, भाजपा कार्यालयों का घेराव और दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की भी घोषणा की है।

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि यह फैसला न केवल राज्यसभा चुनाव बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।

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