गोवा चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा अभियान, 22 सितंबर से निकलेगी 27 दिन की ‘गोय राखोन्न यात्रा’

गोवा विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस 22 सितंबर से ‘गोय राखोन्न यात्रा’ शुरू करेगी। 27 दिन की यात्रा राज्य की सभी 40 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी।;

Update: 2026-09-18 07:29 GMT
नई दिल्ली। गोवा में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के बीच अपनी ‘गोय राखोन्न यात्रा’ का ऐलान किया है। कोंकणी में ‘गोय राखोन्न’ का अर्थ मोटे तौर पर ‘गोवा की रक्षा’ है। पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह यात्रा 22 सितंबर से 18 अक्टूबर 2026 तक चलेगी और करीब 355 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सभी 40 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगी।

27 दिन, 40 विधानसभा सीटें और व्यापक जनसंपर्क

कांग्रेस के इस अभियान का मकसद राज्य के अलग-अलग इलाकों में लोगों से सीधे संवाद करना और पार्टी के संगठन को सक्रिय करना बताया गया है। यात्रा की शुरुआत 22 सितंबर को पणजी के अंबेडकर पार्क से प्रस्तावित है। कांग्रेस ने अभियान के लिए भूमि, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अपराध और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखा है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा यात्रा के अलग-अलग चरणों में शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के भी यात्रा को हरी झंडी दिखाने के लिए गोवा पहुंचने की बात सामने आई है।

AAP-GFP गठबंधन के बाद बदला चुनावी समीकरण

कांग्रेस के अभियान के बीच गोवा की विपक्षी राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ है। आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन का ऐलान किया है। दोनों दलों ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस से अलग राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश किया है।

यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले कांग्रेस और GFP के बीच संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत की खबरें सामने आई थीं। अब AAP और GFP के साथ आने से राज्य में विपक्षी दलों के बीच सीटों और राजनीतिक रणनीति को लेकर समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस ने AAP-GFP गठबंधन पर क्या कहा?

गोवा कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडंकर ने AAP-GFP के ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे बीजेपी के साथ ‘एक्सचेंज ऑफर’ बताते हुए दावा किया कि इसके पीछे गोवा और पंजाब में अलग-अलग दलों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की समझ हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP गोवा में बीजेपी को फायदा पहुंचा सकती है, जबकि बीजेपी पंजाब में AAP की मदद कर सकती है।

हालांकि, यह कांग्रेस का आरोप है और इसके समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से पुष्ट समझौता सामने नहीं आया है। AAP और GFP ने अपने गठबंधन को गोवा के लिए अलग राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया है।

2027 चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति

2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 40 में से 20 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 11, AAP को 2 और GFP को 1 सीट मिली थी। चुनाव के कुछ महीनों बाद कांग्रेस के आठ विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे। ऐसे में 2027 से पहले कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं से सीधे संपर्क बढ़ाने की चुनौती है।

‘गोय राखोन्न यात्रा’ इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी और विपक्षी दलों के बीच गठबंधन को लेकर होने वाली बातचीत गोवा की चुनावी राजनीति की दिशा तय करने वाले प्रमुख घटनाक्रम होंगे।

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