रियाद/सना: यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों और सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच संघर्ष के बीच लाल सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। दिए गए विवरण के अनुसार, गुरुवार को सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने हूती के ठिकानों पर कई हवाई हमले किए। दूसरी ओर, हूती ने यमन के लाल सागर से लगे तटीय इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा किया है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के द्वीपों पर हूती की मौजूदगी ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई है।
लाल सागर के अहम मार्ग पर बढ़ा दबाव
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। हूती की क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ने से इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। दिए गए विवरण के अनुसार, हूती ने सऊदी अरब के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोकने की बात कही है, जबकि अन्य देशों के व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी रहने का दावा किया गया है। यदि क्षेत्र में संघर्ष लंबा चलता है तो समुद्री बीमा, परिवहन लागत और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में करीब तीन फीसदी गिरावट
संघर्ष के बीच तेल आपूर्ति को लेकर बाजार में बनी चिंता में कुछ कमी आने के संकेतों के बाद गुरुवार को कच्चे तेल की कीमत लगभग तीन प्रतिशत घटकर 102.72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। यह पिछले सात दिनों का निचला स्तर बताया गया है, हालांकि युद्ध से पहले की कीमत की तुलना में यह अभी भी ऊंची है। बाजार के लिए लाल सागर के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में दोनों समुद्री मार्गों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार नजर बनी हुई है।
यमन से नागरिकों का पलायन तेज
जमीन पर जारी लड़ाई और हवाई हमलों के बीच बड़ी संख्या में यमनी नागरिक सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की कोशिश कर रहे हैं। दिए गए विवरण के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन ने बताया है कि पिछले सप्ताह संघर्ष शुरू होने के बाद एक लाख से अधिक लोग यमन छोड़कर दूसरे देशों में जा चुके हैं। इनमें से कई लोग समुद्री मार्ग से अफ्रीकी देशों की ओर जा रहे हैं। लगातार संघर्ष के कारण मानवीय स्थिति और नागरिकों की सुरक्षा भी क्षेत्रीय संकट का अहम पहलू बन गई है।
एफ-15 विमान गिराए जाने का दावा
बुधवार को हूती की ओर से सऊदी अरब के अमेरिका निर्मित एफ-15 लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा किया गया। अगले दिन लड़ाकों के विमान के मलबे के आसपास जश्न मनाने के दृश्य सामने आने की बात कही गई है।
ट्रंप ने ईरान से युद्ध खत्म होने के दिए संकेत
लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के जल्द खत्म होने की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है और यह देखा जा रहा है कि बातचीत किस तरह आगे बढ़ती है। इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही भी चर्चा का विषय बनी हुई है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को तीन जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि मंगलवार को 12 मालवाहक जहाजों के गुजरने की बात कही गई थी।
मक्का समझौते से पाकिस्तान की भूमिका पर नजर
सऊदी अरब को सैन्य मदद के सवाल पर पाकिस्तान की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान मक्का सुरक्षा समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पाकिस्तान किस रूप में सहायता करेगा।बताया गया है कि समझौते में किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाता है और मिलकर जवाब देने का प्रावधान है। आसिफ ने कहा कि यदि मक्का पर हमला होता है तो उसकी रक्षा के लिए पाकिस्तान को किसी औपचारिक समझौते की आवश्यकता नहीं होगी।
सऊदी को 48 एफ-35 बेचने की मंजूरी
इसी बीच अमेरिका के विदेश विभाग ने सऊदी अरब को 48 एफ-35 लाइटनिंग-2 लड़ाकू विमान बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित सौदे का मूल्य करीब 24 अरब डॉलर बताया गया है। विमानों की आपूर्ति लॉकहीड मार्टिन करेगी। सौदे में 49 इंजन और अन्य उपकरण भी शामिल बताए गए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है और अपनी वायु एवं मिसाइल रक्षा क्षमता पर जोर दे रहा है।
ड्रोन के मलबे से एक व्यक्ति की मौत
सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, हूती की ओर से छोड़े गए एक ड्रोन को एयर डिफेंस ने मार गिराया। इसके बाद ड्रोन का मलबा आबादी वाले इलाके में गिरा। विभाग के अनुसार, घटना में एक यमनी मूल के व्यक्ति की मौत हुई, जबकि एक सऊदी नागरिक और एक पाकिस्तानी मूल का व्यक्ति घायल हुआ। मलबे से कुछ इमारतों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है। लाल सागर और होर्मुज दोनों समुद्री मार्गों से जुड़ा यह घटनाक्रम अब केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं रह गया है। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके संभावित असर के कारण अमेरिका, पाकिस्तान और अन्य देशों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।