टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक, कांग्रेस ने चुनाव आयोग को घेरा; जानें क्या है पूरा विवाद

पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने TMC के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक लगा दी है। जानें कांग्रेस की प्रतिक्रिया और पूरा विवाद।;

Update: 2026-09-18 04:29 GMT

नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा उपचुनावों के लिए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यह रोक फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू की गई है।

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को क्या निर्देश दिया?

आयोग के मुताबिक उसके सामने तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं। एक का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों ही खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे हैं। इसी विवाद के बीच आयोग ने चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत आगे विस्तृत निर्णय की जरूरत बताई है।

अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को नए नाम के तीन-तीन विकल्प और तीन-तीन फ्री चुनाव चिह्नों के विकल्प देने को कहा गया है। आयोग इनमें से विकल्पों के आधार पर उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को अलग पहचान और चिह्न आवंटित करेगा। यह व्यवस्था विवाद पर अंतिम फैसला होने तक जारी रहेगी।

किन सीटों पर होना है उपचुनाव?

यह फैसला पश्चिम बंगाल की आगामी विधानसभा उपचुनाव प्रक्रिया के बीच आया है। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। दोनों गुटों ने इन चुनावों के लिए अपने उम्मीदवार उतारे हैं और पार्टी की पहचान तथा चुनाव चिह्न पर दावा किया है।

चुनाव आयोग ने कहा है कि फिलहाल उसका उद्देश्य दोनों गुटों को समान स्थिति में रखते हुए चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला विस्तृत प्रक्रिया के बाद किया जाएगा।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि TMC का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘देर रात जन्मदिन का तोहफा’ है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया। ये कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं, आयोग के फैसले पर उसका आधिकारिक निष्कर्ष नहीं।

पवन खेड़ा ने भी फैसले पर उठाए सवाल

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी चुनाव आयोग के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि AITC के नाम और चुनाव चिह्न को रोकना आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अलग हुए गुट का पार्टी के नाम और चिह्न पर वैध दावा नहीं है।

फिलहाल चुनाव आयोग का आदेश अंतरिम है। यानी इससे यह तय नहीं हुआ है कि पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न पर अंतिम अधिकार किस गुट का होगा। यह फैसला आयोग की आगे की विस्तृत सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आएगा।

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