डोभाल का बीजिंग दौरा कल से, चीन से सीमा विवाद पर होगी अहम बातचीत; शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले बढ़ी हलचल

अजीत डोभाल के बीजिंग दौरे में भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वें दौर की SR वार्ता होगी। शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले बैठक को अहम माना जा रहा है।;

Update: 2026-08-23 11:28 GMT
नई दिल्ली। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे। यहां मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स (एसआर) स्तर की 25वें दौर की वार्ता होगी। दोनों देशों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। साथ ही, सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर भी कूटनीतिक हलचल तेज है।

25वें दौर की एसआर वार्ता में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अजीत डोभाल और वांग यी भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर बातचीत करेंगे। दोनों नेता सीमा वार्ता के लिए नियुक्त स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स हैं। यह संवाद प्रक्रिया वर्ष 2003 में दोनों देशों के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़े विवाद का व्यापक समाधान तलाशने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

हालांकि अब तक इस प्रक्रिया से सीमा विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, लेकिन दोनों देश इसे तनाव कम करने और सीमा से जुड़े मुद्दों पर संवाद बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं।

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले अहम बैठक

डोभाल का चीन दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले हो रहा है। शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स समिट में शामिल होने की चर्चा है। हालांकि उनकी यात्रा की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना भी बन सकती है। ऐसे में डोभाल-वांग वार्ता दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अहम आधार तैयार कर सकती है।

जयशंकर ने सीमा पर शांति को बताया जरूरी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी हाल ही में चीन के साथ संबंधों को लेकर सीमा पर शांति और स्थिरता की जरूरत पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2020 से 2024 के बीच दोनों देशों के संबंधों में मुश्किल दौर रहा, जिसका प्रमुख कारण सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति थी। उनके मुताबिक, सीमा पर शांति दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी जारी है विवाद

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी मतभेद बने हुए हैं। चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है और समय-समय पर वहां के स्थानों के लिए अपने नाम जारी करता है। भारत ने चीन के इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है।

नई दिल्ली लगातार कहती रही है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों को सामान्य रखने की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है। ऐसे में बीजिंग में होने वाली 25वें दौर की वार्ता पर दोनों देशों की नजरें रहेंगी।

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