मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी पर कांग्रेस का सवाल, जयराम रमेश ने अमित शाह पर साधा निशाना
संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने परिसीमन विधेयक और दो-तिहाई बहुमत को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।;
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने यानी सत्रावसान में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पूछा कि क्या सरकार अब भी परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को किसी विशेष सत्र में पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है।
लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, रविवार तक दोनों सदनों के सत्रावसान की औपचारिक घोषणा नहीं हुई। कांग्रेस ने इसी देरी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है।
10 दिन बाद भी सत्रावसान नहीं, कांग्रेस ने पूछा सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि सामान्य तौर पर सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और उसके औपचारिक सत्रावसान के बीच कुछ दिनों का अंतर रहता है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा स्थिति में असामान्य देरी दिखाई दे रही है।
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पोस्ट में 2015 और 2021 के उदाहरणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन वर्षों में भी स्थगन और सत्रावसान के बीच लंबा अंतर रहा था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में देरी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए पूछा कि क्या सरकार अब भी परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को विशेष सत्र में पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने में लगी है।
सत्रावसान की संवैधानिक प्रक्रिया भी बताई
जयराम रमेश ने संसद की कार्यप्रणाली से संबंधित पुस्तक का हवाला देते हुए सत्रावसान की संवैधानिक प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति के आदेश से संसद के सत्र की समाप्ति को सत्रावसान कहा जाता है। राष्ट्रपति इस संबंध में प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्रवाई करते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आम तौर पर सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के बाद सत्रावसान किया जाता है। इसके बाद अगले सत्र के शुरू होने तक की अवधि को इंटर-सेशन पीरियड कहा जाता है।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर कांग्रेस की मांग
कांग्रेस लंबे समय से लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग कर रही है। पार्टी का कहना है कि इसी मौजूदा सीट संरचना में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
कांग्रेस कार्यसमिति ने भी प्रस्ताव पारित कर 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई है। पार्टी का तर्क है कि परिसीमन के कारण राज्यों के प्रतिनिधित्व में तत्काल बदलाव करने के बजाय मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय तक बनाए रखना चाहिए।
दो-तिहाई बहुमत को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच पहले भी राजनीतिक टकराव देखने को मिला है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार के पास संविधान संशोधन पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर विपक्षी दलों से समर्थन की अपील को भी राजनीतिक रणनीति करार दिया था।