UP विधानसभा चुनाव से पहले 44 नेताओं की सुरक्षा बढ़ी, बुलेटप्रूफ जैकेट से लैस होंगे प्रमुख सियासी चेहरे
सुरक्षा आकलन के आधार पर जिन नेताओं को पहले से जेड और वाई प्लस जैसी श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, उनमें से कई को बुलेटप्रूफ जैकेट दी जा रही है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती और केशव प्रसाद मौर्य को जैकेट उपलब्ध कराई जा चुकी है।;
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के 44 प्रमुख नेताओं को बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई जा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के इस कदम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हैं।
44 नेताओं को मिलेगी बुलेटप्रूफ जैकेट
सुरक्षा आकलन के आधार पर जिन नेताओं को पहले से जेड और वाई प्लस जैसी श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, उनमें से कई को बुलेटप्रूफ जैकेट दी जा रही है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव, मायावती और केशव प्रसाद मौर्य को जैकेट उपलब्ध कराई जा चुकी है। अन्य नेताओं के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन में नेताओं की सुरक्षा जरूरत, उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों और संभावित जोखिम को ध्यान में रखा गया है। विधानसभा चुनाव के करीब आने के साथ राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। ऐसे में जनसभाओं, यात्राओं और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
कई मंत्रियों को भी सुरक्षा कवच
योगी आदित्यनाथ सरकार के कई मंत्रियों को पहले से ही श्रेणीबद्ध सुरक्षा प्राप्त है। इनमें ओम प्रकाश राजभर, नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', संजय निषाद, आशीष पटेल, स्वतंत्र देव सिंह, जयवीर सिंह, सुरेश खन्ना, चौधरी लक्ष्मी नारायण, बेबी रानी मौर्य और बलदेव सिंह ओलख शामिल हैं। इन नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा केंद्रीय और राज्य अभिसूचना एजेंसियों के इनपुट के आधार पर की गई है। जिन नेताओं के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट की जरूरत महसूस की गई, उन्हें चरणबद्ध तरीके से यह सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराया जा रहा है।
विपक्ष के नेताओं को भी सुरक्षा
सुरक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया केवल सत्तारूढ़ दल तक सीमित नहीं है। विपक्ष के प्रमुख नेताओं को भी इसमें शामिल किया गया है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी को भी बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराई जा रही है। इससे साफ है कि सुरक्षा एजेंसियां राजनीतिक दलों से अलग हटकर नेताओं के खतरे और सुरक्षा जरूरत के आधार पर व्यवस्था तैयार कर रही हैं।
10 लाख रुपये से अधिक की एक जैकेट
जानकारी के मुताबिक, असॉल्ट राइफल से निकलने वाली गोलियों की बौछार का सामना करने में सक्षम एक बुलेटप्रूफ जैकेट की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक होती है। इस हिसाब से 44 नेताओं के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली जैकेटों की कीमत करीब 4.40 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो सकती है।
यूपी में 11 लोगों को जेड प्लस सुरक्षा
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 11 लोगों को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। इनमें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व सांसद विनय कटियार, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और अयोध्या मामले में फैसला देने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल शामिल हैं।
जेड श्रेणी में भी कई बड़े नाम
जेड श्रेणी की सुरक्षा पाने वालों में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, पूर्व विधायक संगीत सोम, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', स्वतंत्र देव सिंह, जयवीर सिंह, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी शामिल हैं। वहीं, 10 लोगों को एस्कॉर्ट के साथ वाई प्लस सुरक्षा दी गई है। इनमें मंत्री संजय निषाद, विधायक पंकज सिंह, पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, पूर्व राज्यपाल फागू चौहान, महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा बिष्ट यादव, पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सदस्य बृजलाल, पूर्व सांसद राजवीर सिंह, विधायक पूजा पाल और काशी के सतुआ बाबा समेत अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।
चुनावी माहौल में सुरक्षा पर फोकस
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत विभिन्न दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। आने वाले महीनों में बड़े नेताओं के दौरे, रोड शो, जनसभाएं और राजनीतिक कार्यक्रम बढ़ सकते हैं। ऐसे में प्रमुख नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का यह कदम चुनावी दौर में वीआईपी सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।