नयी धड़कन जगाती तस्वीरें

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को आंदोलनकारियों पर लाठियां बरसाना, आंसू गैस के गोले छोड़ना सरकार का गलत फैसला था और अब इसमें एक बड़ी साजिश भी दिखाई दे रही है;

By :  DB Desk
Update: 2026-07-23 21:20 GMT

पेपर लीक पर समय रहते कार्रवाई न करने और अपना दंभ न छोड़ने की बड़ी भारी कीमत नरेन्द्र मोदी और भाजपा को चुकानी पड़ सकती है, यह देश का मौजूदा माहौल बता रहा है। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को आंदोलनकारियों पर लाठियां बरसाना, आंसू गैस के गोले छोड़ना सरकार का गलत फैसला था और अब इसमें एक बड़ी साजिश भी दिखाई दे रही है कि पुलिस की वर्दी में आए गुंडों ने आंदोलनकारियों का दमन किया। बहुत सी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जिनमें नजर पुलिस की क्रूरता नजर आ रही है। अब मामला अदालत तक पहुंच चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई चीफ जस्टिस देवेन्द्र उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने की। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 4 सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा/जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और अन्य रिकॉर्ड से छेड़छाड़ न करने और उन्हें पूरी तरह संरक्षित रखने को कहा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की गई है। लेकिन इससे पहले जनता की अदालत में नरेन्द्र मोदी के 12 सालों पर सुनवाई शुरु हो चुकी है।

जंतर-मंतर से जो छवियां आ रही हैं, उनमें नजर आ रहा है कि मामला अब केवल धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार तक सीमित नहीं है। लोग हर उस बात पर शिकायत कर रहे हैं, जिनके कारण देश की दुर्दशा हुई है। हमारे पास जॉब नहीं है, आज भगा दो, कल फिर आएंगे, ऐसे पोस्टर्स, मेलोनी के हाथ के बने समोसे ले लो जैसे तंज, यह कहना कि जब राघव चड्ढा बिक सकता है तो फिर मीडिया तो मीडिया है, हनुमान चालीसा बजा कर उस पर थिरकना, उसमें मुस्लिमों का भी साथ आना, हाथ में तिरंगा लेकर चल रहे युवक को पुलिस ने उठा कर पटका तो उसने फौरन उठकर तिरंगा लहराया, ऐसे हजारों-हजार दृश्य भाजपा के खोखले राष्ट्रवाद, हिंदू-मुसलमान जैसे एजेंडे को मटियामेट कर रहे हैं। मोदी की विदेश यात्राओं से लेकर विपक्षी दलों के लोगों को तोड़ने तक सारी रणनीतियों का जवाब अब जनता अपने तरीके से दे रही है। नयी पीढ़ी की रचनात्मकता देखकर भाजपा आईटी सेल अब सकते में है कि किस तरह मोदी विरोधी नारों का जवाब दे।

जंतर-मंतर पर अब कॉकरोच जनता पार्टी तक भी बात सीमित नहीं रह गई है। अभिजित दिपके तो गुरुवार को बीमारी का हवाला देकर जंतर-मंतर से अनुपस्थित रहने की बात कह चुके हैं और इसके लिए माफी भी मांग ली, इस बीच सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने राहुल गांधी की आलोचना इस बात के लिए की कि वे प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देने क्यों गए। उन्होंने इसे अगंभीर काम बताया। पहले सोनम वांगचुक खुद शिकायत कर चुके हैं कि राहुल जंतर-मंतर नहीं आए। आम आदमी पार्टी भी लगातार राहुल गांधी पर हमलावर है। इन बातों से यह संदेह और पुख्ता होता है कि राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज आंदोलन जो छेड़ा था, उससे सरकार को तकलीफ हो रही थी और विपक्ष को कमजोर करने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी को आंदोलन करने दिया गया। इस आंदोलन के कारण ही बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पर जुटे भी, लेकिन अब आंदोलन की बागडोर पूरी तरह स्वत:स्फूर्त उमड़ी जनता के हाथों में ही दिख रही है। मंच पर कौन से राजनैतिक दल के नेता या कौन सी मशहूर हस्ती पहुंच रही है, दिपके कहां हैं, ये सारी बातें अब आंदोलनकारियों के लिए मायने नहीं रख रहीं। वे व्यवस्था में पसर चुकी गंदगी को दूर करने के लिए खुद ही आगे आ रहे हैं और पर्याप्त अनुशासन बनाए हुए हैं। बेशक कुछ असामाजिक तत्व इनके बीच पहुंच कर माहौल बिगाड़ने की फिराक में हैं, लेकिन गनीमत है कि सब कुछ नियंत्रण में है, यही भारतीय जनता का कमाल है। जहां तक राहुल गांधी का सवाल है, तो उन्होंने एकदम साफ कर दिया है कि छात्रों को इंसाफ जब तक नहीं मिलेगा, वो चुप नहीं बैठेंगे।

गुरुवार को संसद में विपक्षी सांसदों ने एकजुटता के साथ मोदी सरकार के खिलाफ, धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर नारेबाजी की। विपक्ष से घबराई सरकार अब अपने बचाव में उसे ही दोषी ठहरा रही है। धर्मेन्द्र प्रधान का ट्वीट, जे पी नड्डा की प्रेस कांफ्रेंस सब में राहुल गांधी पर आरोप लगाए गए हैं कि वे राजनीति कर रहे हैं। पवन खेड़ा ने इसका जवाब दिया है कि जब वे धर्म का राजनीतिकरण कर सकते हैं, तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार के मुद्दे का राजनीतिकरण कैसे नहीं होगा। इधर नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट में लिखा कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। लेकिन इस ऐलान में मोदी ने बहुत देर कर दी। यह बात अगर वो मई में तब कहते जब पेपर लीक की खबरें आई थीं, तब तो उनके इरादे नेक माने जाते। इस समय तो नजर आ गया है कि मोदी राहुल गांधी के बढ़ते प्रभाव को दबाने के लिए ऐसा ट्वीट कर रहे हैं।

इस बीच महाराष्ट्र, बिहार जैसे राज्यों से भी आंदोलनों की खबरें हैं। महाराष्ट्र में छात्रों को हिरासत में लेकर जाती एक पुलिस वैन को एक लड़की ने सामने खड़े होकर रोक लिया और बाद में बाकी लोग उसके साथ आ गए। बिहार में पुलिस ने पानी की बौछारों से प्रदर्शनकारियों को हटाना चाहा तो वे वहीं गाते-बजाते थिरकने लगे। रस्सियां लगाईं तो रस्साकशी का खेल खेल लिया और बैरिकेड्स भी उठाकर ले गए। ये सारे वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर हैं, जो दिखा रही हैं कि नयी पीढ़ी कैसे बेखौफ अपना हक मांग रही है। बरसों-बरस डर-सहम कर रहने वाले समाज में ये तस्वीरें नयी धड़कन जगा रही हैं।

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