सुबह से चल रहा था दस्त का इलाज, शाम को निमोनिया से मासूम की मौत

लगातार दस्त से पीड़ित 8 माह के मासूम की सीएचसी में इलाज के दौरान मौत हो गई

Update: 2018-02-28 13:18 GMT

कोरबा। लगातार दस्त से पीड़ित 8 माह के मासूम की सीएचसी में इलाज के दौरान मौत हो गई। इकलौते मासूम बेटे की मौत से बिलखते परिजनों ने चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार पाली विकासखंड के ग्राम बक्साही निवासी नरेन्द्र डिक्सेना के 8 माह के पुत्र यश को आज सुबह से दस्त की शिकायत थी। लगातार दस्त होने के कारण नरेन्द्र की पत्नी पिंकी बच्चे को लेकर इलाज कराने पाली पहुंची एवं डॉ. अनिल सराफ से इलाज कराया। इलाज के बाद बच्चे को घर ले गए किन्तु कोई सुधार न होने पर दोपहर 12 बजे पुन: डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे तब बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया।

बच्चे का उपचार किया जा रहा था कि इस बीच उसकी हालत बिगड़ती देख परिजनों द्वारा रिफर कर देने की गुहार लगाई जाती रही, जिसे डॉक्टर और स्टाफ ने अनसुना कर दिया। इस दौरान शाम करीब 5 बजे बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने लगी तब नरेन्द्र ने डॉक्टर को बुलाया। बार-बार बुलाने के बाद डॉक्टर सराफ ने पहुंचकर जांच की तो निमोनिया होना बताया। तुरंत बच्चे को मुंह में भाप दिया और उसकी छाती को दबाने लगे।

कुछ ही सेकेण्ड के बाद मासूम यश के नाक और मुंह से झाग निकला और उसकी सांस थम गई। मासूम के पिता नरेन्द्र एवं परिजनों ने डॉ. सराफ पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब सुबह से दस्त का इलाज कर रहे थे तो शाम को निमोनिया होना कैसे बताया? बार-बार बुलाने पर भी डॉक्टर तुरंत नहीं आये और बच्चे को सही जांच कर रेफर भी नहीं किया।

पानी पेट में नहीं फेफड़ा में जाने से हुई दिक्कत

मासूम का इलाज करने वाले डॉ. अनिल सराफ ने बताया कि बच्चे को दस्त की शिकायत होने पर सीएचसी में भर्ती किया गया था। उसे बॉटल चढ़ाया गया था व एंटीबायोटिक भी दिया गया था। बच्चे के को बीच-बीच में दूध भी पिलाने के लिए कहा गया था ताकि कमजोरी न आये। उसे परिजन ओआरएस का घोल भी पिला रहे थे। शाम को करीब 5.30 बजे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने की बात आकर परिवार के लोगों ने बतायी। तत्काल बच्चे का परीक्षण किया तो निमोनिया होना पाया। बच्चे को तुरंत भाप दिया गया किन्तु नाक और मुंह से झाग निकलने लगा।

डॉ. सराफ ने बताया कि दरअसल बच्चे को एक्यूट एक्सप्रीटेड निमोनिया हो गया था जो परिजनों के द्वारा बच्चे के लेटे हुए हालत में पानी पिलाये जाने से हुआ था। बच्चे के द्वारा सांस लेने व छोड़ने के दौरान असावधानीवश उसे पानी पिलाये जाने से पानी सीधा पेट में न जाकर फेफड़ा में चला गया और पानी व हवा के मिश्रण से झाग बनकर नाक व मुंह से बाहर निकला। ऐसी स्थिति में श्वांस नली अटक जाती है और बमुश्किल 5 से 10 मिनट का ही वक्त पीड़ित को मिलता है। हमने बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश की। उसके इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही हमने नहीं की।

सीएचसी की व्यवस्था में लापरवाही, बच्चों को कराया रेफर

इस घटना के दौरान सीएचसी में मौजूद अव्यवस्थाएं भी सामने आयी। अस्पताल में प्रतिदिन शिफ्टवार ड्यूटी डाक्टर व कर्मचारी का नाम बोर्ड में लिखा जाता है किन्तु यहां आज 26 फरवरी होने के बावजूद बोर्ड में 19 जनवरी लिखा हुआ था हालांकि तैनात स्टाफ का नाम वर्तमान स्थिति के अनुसार देखा गया। इस तरफ जब यहां  मौजूद जागरूक लोगों ने स्टाफ का ध्यान दिलाया तब ड्यूटी पर तैनात डॉ. सौरभ गुप्ता ने तुरंत 19 जनवरी को मिटवाया।

दूसरी ओर मासूम यश की मौत और इलाज में लापरवाही का आरोप लगने उपरांत यहां उपचार और बच्चों में कुछ को उनके परिजनों द्वारा तत्काल दूसरे अस्पताल रेफर करा लिया गया। 
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