ललित सुरजन की कलम से मानसरोवर यात्रा पर राहुल
'जब पंडित नेहरू नैनी जेल में कैद थे तब उन्होंने माघ स्नान के लिए जाते श्रद्धालुओं को लेकर गंगा के बारे में इंदिरा जी को एक रोचक पत्र लिखा था।';
'जब पंडित नेहरू नैनी जेल में कैद थे तब उन्होंने माघ स्नान के लिए जाते श्रद्धालुओं को लेकर गंगा के बारे में इंदिरा जी को एक रोचक पत्र लिखा था।'
'इसी तरह वे जब अहमदनगर जेल में बंद थे तब बुद्ध पूर्णिमा का चन्द्रमा देखकर उन्होंने भगवान बुद्ध के बारे में एक संक्षिप्त लेकिन सटीक टिप्पणी लिखी थी। यह भी हमें पता है कि गीता उनके सिरहाने हमेशा रखी रहती थी और वे नियमित योगाभ्यास भी करते थे। शीर्षासन की मुद्रा में उनका फोटो बहुत ही दिलचस्प है। इलाहाबाद के पैतृक घर आनंद भवन के संग्रहालय में यह देखना दिलचस्प है कि नेहरू जी ने इंदिरा गांधी के जन्म पर उनकी कुंडली भी बनवाई थी। इन तथ्यों के आईने में अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एक आस्थावान व्यक्ति थे। वे जड़ अर्थ में नास्तिक नहीं थे लेकिन उनकी रुचि तत्वज्ञान में अधिक थी, कर्मकांड में उनका विश्वास लगभग नहीं था और वे धर्म को निजी आस्था का विषय मानते थे।'
(देशबन्धु में 06 सितंबर 2018 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2018/09/blog-post.html