ललित सुरजन की कलम से - भाजपा का भविष्य

'श्री नरेन्द्र मोदी और हिटलर के बीच प्रकारान्तर से तुलना की जाती है, लेकिन क्या आज की दुनिया में और विशेषकर स्वतंत्र भारत की अपनी राजनीतिक परंपरा में किसी भी व्यक्ति का हिटलर बन पाना संभव है

By :  Deshbandhu
Update: 2026-03-10 22:48 GMT

'श्री नरेन्द्र मोदी और हिटलर के बीच प्रकारान्तर से तुलना की जाती है, लेकिन क्या आज की दुनिया में और विशेषकर स्वतंत्र भारत की अपनी राजनीतिक परंपरा में किसी भी व्यक्ति का हिटलर बन पाना संभव है? दूसरी ओर यह प्रश्न भी उठता है कि देश के कॉरपोरेट घराने अपने साम्राज्य के निर्बंध विस्तार के लिए जो माहौल चाहते हैं, क्या वह सांप्रदायिक अशांति से उपजे माहौल में संभव हो पाएगा? मेरी दृष्टि में दोनों का ही जवाब नहीं में होना चाहिए।'

'मैं एक और संभावना देखता हूं। यदि नरेन्द्र मोदी ले-देकर प्रधानमंत्री बन भी गए तो उन्हें मजबूर होकर क्षेत्रीय व छोटे दलों से समझौता करना पड़ेगा, हाशिए पर डाल दिए गए बुजुर्ग नेताओं की अनुपस्थिति में भाजपा का नए सिरे से गठन करना होगा, देश-विदेश के तमाम मसलों पर निर्णय लेना पड़ेगा और तब परीक्षा होगी कि मीडिया और छविनिर्माण एजेंसियों ने भारी रकम और बड़ी मेहनत कर जो प्रपंच रचा है, उसमें नरेंद्र मोदी बोरिस येल्तसिन सिध्द होते हैं या ब्लीदीमिर पुतिन!!'

(देशबन्धु में 20 मार्च 2014 को प्रकाशित)

https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/03/blog-post_19.html

Tags:    

Similar News