देश की आवाज बने राहुल

इस समय परेशान तो सब हैं। मगर यह पहली बार है कि छात्र सामने आए हैं। खासतौर से सीबीएसई की परीक्षा में धांधली के बाद।;

Update: 2026-06-14 21:40 GMT

इस समय परेशान तो सब हैं। मगर यह पहली बार है कि छात्र सामने आए हैं। खासतौर से सीबीएसई की परीक्षा में धांधली के बाद। बारहवीं की परीक्षा कभी विवादों में नहीं होती थी। चाहे केन्द्रीय बोर्ड की हो या राज्यों के बोर्डों की। 12 वीं के रिजल्ट पर ही बच्चों का भविष्य निर्भर करता है। यही बच्चे दसवीं के बाद से या कुछ बारहवीं के बाद भी कोटा में कोचिंग लेने जाते हैं।

राहुल राजनीति करने लगे हैं। जरूरी था यह। लोगों में उत्साह इसी से बढ़ता है। इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा तो सहयोगी विपक्षी दलों से था मगर लगा कि यह बात जनता तक जाना चाहिए तो अपना वहां दिया भाषण सार्वजनिक कर दिया। पहले जो अंग्रेजी में दिया था ओरिजनल वह और फिर उसी का हिन्दी रूपान्तरण। उसमें उन्होंने जो सबसे राजनीतिक बात कही है वह यह कि 2029 में हम आ रहे हैं। जनता यही सुनना चाहती थी। विपक्ष के नेता तो इससे उत्साहित हुए ही। खुद कांग्रेस में एक जोश आ गया। छात्र सम्मेलनों का एक नया कार्यक्रम फौरन बन कर आ गया।

इस समय परेशान तो सब हैं। मगर यह पहली बार है कि छात्र सामने आए हैं। खासतौर से सीबीएसई की परीक्षा में धांधली के बाद। बारहवीं की परीक्षा कभी विवादों में नहीं होती थी। चाहे केन्द्रीय बोर्ड की हो या राज्यों के बोर्डों की। 12 वीं के रिजल्ट पर ही बच्चों का भविष्य निर्भर करता है।

यही बच्चे दसवीं के बाद से या कुछ बारहवीं के बाद भी कोटा में कोचिंग लेने जाते हैं। बहुत मशहूर जगह हो गई है। इसके गुण दोषों पर यहां बात नहीं करेंगे गोदी मीडिया ने इन पर गलत तरीके से सवाल उठाकर स्टूडेंट का बहुत नुकसान कर दिया है। सही बहस को जो हमेशा से होती रही है शिक्षक विरोधी बना दिया। यह स्टूडेंट के हित में नहीं है।

खैर तो कांग्रेस ने कोटा में पहला छात्र सम्मेलन रखा है। सही जगह चुनी है। राहुल छात्रों से बात करने के लिए खुद यहां मौजूद होगें। सम्मेलन नीट की दोबारा हो रही परीक्षा से पहले हो रहा है। नीट की पहली बार हुई परीक्षा के पेपर लीक हो गए थे। इसमें भाग लेने वाले लगभग 28 लाख स्टूडेंट और उनके माता-पिता भारी निराशा में घिर गए थे। मगर स्टूडेंट ने आवाज उठाई कांग्रेस साथ में आई। और जो मोदी सरकार पहले मना कर रही थी कि पेपर लीक नहीं हुए उसे मानना पड़ा और अब 21 जून को दोबारा परीक्षा हो रही है। एक ही परीक्षा को दो दो बार देना पड़ेगा सोचिए कितना तनाव होगा स्टूडेंट पर। मगर 17 जून को राहुल उनसे मिलेंगे और हिम्मत देने की कोशिश करेंगे। छात्र सम्मेलनों का यह सिलसिला करीब एक महीने चलेगा और कई शहरों में होते हुए दिल्ली में 14 जुलाई को इसका समापन होगा।

देश में यह एक नई समस्या पैदा कर दी गई है। बच्चों की परीक्षा ठीक से नहीं लेना। उनका भविष्य यहीं से लड़खड़ना शुरू कर देता है। विद्यार्थियों के बाद आने वाली पीढ़ी युवाओं का हाल पहले से बुरा है। नौकरियां बंद कर दी गई हैं। बेरोजगारी का यह हाल है कि ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट प्रोफेशनल डिग्रियां लिए हुए युवाओं को वह काम करना पड़ रहे हैं जहां उनकी पढ़ाई की कोई जरूरत ही नहीं है। सेल्समेन, टू व्हीलर लेकर जमेटो स्वीगी का खाना पहुंचाने का काम, केब ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड जैसे वह काम करना पड़ रहे हैं जहां ज्यादा शिक्षा का काम ही नहीं है। कम पढ़े लिखे, नहीं पढ़े-लिखे, ज्यादा पढ़े लिखे सब एक लाइन में खड़े कर दिए मोदी जी ने।

इस दबी हुई समस्या को राहुल ने उठाना शुरू किया। उन्हीं के प्रयासों से गिग वर्कर ( ऐसे ही छोटा मोटा काम करके गुजारा करने वाले) की हालत पर थोड़ी चर्चा शुरू हुई और समस्या की पहचान हुई। यह रोजगार नहीं है। मजबूरी है। देश की युवा शक्ति के साथ मजाक। कहते हैं भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। मगर वह युवा करता क्या है। निराशा में जीता हुआ। जवानी खत्म हो रही है।

आज के छात्र उस स्थिति में जाने को तैयार नहीं हैं। इसलिए पहली बार वे नीट की परीक्षा में पेपर लीक और फिर सीबीएसई की परीक्षा में गड़बड़ी पर सामने आए। अब राहुल उनकी आवाज बन गए हैं। और राहुल यह बात समझकर अब ज्यादा प्रेक्टिकल एप्रोच से सामने आए हैं।

उनका इंडिया गठबंधन की बैठक में दिया भाषण बहुत चर्चित हो रहा है। उसके आदर्शवादी पक्ष पर बहुत बातें हो रही हैं। अच्छी बात है। राहुल शुरू से आदर्शवादी रहे हैं। भाजपा के दुष्प्रचार का इतना लंबा मुकाबला उन्होंने अपने इन आदर्शवादी मूल्यों से ही किया। 2004 से लेकर आज तक। 22 साल हो गए हैं। इतने लंबे समय हजारों करोड़ रुपया खर्च करके किसी के खिलाफ भी ऐसा सुनियोजित अभियान चलाया जाता तो वह खत्म हो जाता। मगर अपने उसूलों पर टिके राहुल आज भी उतनी हिम्मत और अंग्रेजी में जिसे कहते हैं कूल रहकर (शांत और संयमित) उस झूठे प्रचार को गलत साबित कर रहे हैं।

मगर जनता खासतौर से युवा और छात्र अब बर्दाश्त नहीं कर सकते। उनके सब्र की सीमाएं टूट रही हैं। देश में जो हो रहा है वह तो है ही। आर्थिक स्थिति पूरी तरह बर्बाद हो गई है। केवल गलत आंकड़ों के जरिए लोगों को बहकाया जा रहा है। तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से छोटा कारोबार करने वाले सब तबाह हो गए हैं। घरेलू स्थिति में कुछ भी अच्छा नहीं है।

और उधर विदेश से भी तगड़ी मार पड़ रही है। अमेरिका ने हमारे तीन जहाजी मार डाले और कह रहा है कि हुकुम की नाफरमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हत्याओं को जस्टिफाई कर रहा है। मगर प्रधानमंत्री मोदी खामोश हैं।

मौन डॉ. मनमोहन तो बहुत कहा। मगर अब दुनिया देख रही है कि मोदी मौन हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बहुत कड़ा हमला किया है। उन्होंने कहा कि कंप्रोमाइजड प्रधानमंत्री के राज में भारतीय होने का मतलब दुर्गति है।

बड़ा नेता वही होता है जो सही समय पर जवाब देता है। याद है प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था 2014 से पहले भारत में पैदा होना शर्म की बात थी। मगर वह कोई उदाहरण नहीं पाए। था ही नहीं। भारत ने सारी तरक्की 2014 से पहले की थी। मगर रविवार को जो राहुल ने ट्वीट किया वह ओमान तट पर फंसे जहाज के कप्तान की मदद की गुहार के बाद था। वहां जहाज के सैंकंड आफिसर निशांत के न रहने पर उसका शव जहाज पर खराब हो रहा है। कोई मदद नहीं हो रही। कप्तान का मैसेज बहुत दर्दनाक है। उसके बाद ही राहुल ने कहा कि विदेशी ताकत हमारे नागरिकों को मारती है। और हमारी सरकार अपने आदमी को सड़ने के लिए छोड़ देती है। इस भारतीय को घर लाइए।

इससे पहले तीन जहाजियों की अमेरिका द्वारा हत्या जो अलग मामला है पर भी राहुल ने देश की भावनाओं के अनुरूप बहुत कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि न अफसोस न माफी! बल्कि अमेरिका कह रहा है अमेरिकी सेना के आदेश मानें। कोई हुक्म ऊदूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राहुल ने कहा देश यह नहीं सहेगा। मगर प्रधानमंत्री एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते और आदेश मानते हैं।

स्थिति चारों तरफ से खराब है। और अब प्रधानमंत्री मोदी के बस में नहीं है कि वे आन्तरिक या बाहरी किसी भी स्थिति का सामना कर पाएं। राहुल देश की परिस्थितियों को समझ रहे हैं। इसलिए पहले कांग्रेस के आदिवासी सम्मेलन में उन्होंने कहा कि मोदी एक साल के अंदर चले जाएंगे। और फिर अभी इंडिया गठबंधन की मीटिंग में अपने विपक्षी दलों के साथियों से कहा कि निराश होने की जरूरत नहीं है। अब वह समय आ गया है। अगला चुनाव आप जीतने वाले हैं। जनता में बहुत गुस्सा है। वे चाहे जितनी चुनाव धांधली करें जनता अब उन्हें हरा कर मानेगी।

जनता यही उम्मीद चाहती है। विपक्ष भी। राहुल अब यह भरोसा दिलाने में कामयाब हो रहे हैं। और एक बार भरोसा हो जाता है तो जैसे नेपोलियन ने कहा था कहां है आल्पस पर्वत? कहीं नहीं और पूरी सेना इस अलंघ्य पर्वत को पार कर गई थी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)

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