ललित सुरजन की कलम से - प्रधानमंत्री या ब्रांड एम्बेसेडर

'प्रधानमंत्री ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा स्थापित योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन कर दिया

Update: 2026-01-28 22:04 GMT

'प्रधानमंत्री ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा स्थापित योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन कर दिया। लेकिन उससे हुआ क्या? योजना आयोग एक स्वायत्त संस्था थी, जिसकी जिम्मेदारियां सुनिश्चित थीं, परन्तु कोई नहीं जानता कि नीति आयोग क्या कर रहा है।

वह एक स्वायत्त संस्था न होकर सरकार द्वारा नियंत्रित एक इकाई बनकर रह गया है। उसी तरह मोदी सरकार में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करने के प्रयत्न भी बार-बार हुए और अंतत: इसमें सफलता मिल गई।

प्रमाण विमुद्रीकरण के रूप में सामने है। गवर्नर उर्जित पटेल मुंह छुपाए घूम रहे हैं और रिजर्व बैंक कर्मचारी यूनियन उनसे अपने पद की गरिमा बचाने की अपील कर रही है। आए दिन खबरें सुनने मिलती हैं कि प्रधानमंत्री ने इसकी क्लास ली, उसकी क्लास ली, ऐसे फटकारा, वैसे फटकारा, मंत्री तक उनके सामने जुबान नहीं खोलते, अधिकारी हर समय दहशत में रहते हैं और यह कि प्रधानमंत्री का विश्वस्त अमला मंत्रियों और अधिकारियों पर चौबीस घंटे नजर रख रहा है इत्यादि।

यह कैसा नेतृत्व है जिसमें निकट सहयोगियों से भी संवाद न हो? क्या हमारे प्रधानमंत्री अमित शाह और अजित डोभाल के अलावा अन्य किसी पर विश्वास नहीं करते?'

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