ललित सुरजन की कलम से ग्रेट ब्रिटेन के आखिरी (?) चुनाव
'पूरे देश में एक साथ साढ़े छ: सौ सीटों पर 7 मई को चुनाव सम्पन्न हुए और उसी रात नतीजे आना भी शुरु हो गए।;
'पूरे देश में एक साथ साढ़े छ: सौ सीटों पर 7 मई को चुनाव सम्पन्न हुए और उसी रात नतीजे आना भी शुरु हो गए। चौबीस घंटे बीतते न बीतते सारे परिणाम घोषित हो चुके थे। हमारे देश में जहां चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होने में डेढ़-दो माह का समय लग जाता है यह एक आश्चर्यजनक खबर ही है। हमारा चुनाव आयोग जो तैयारियां करता है वे हनुमान की पूंछ की तरह कभी खत्म होने में ही नहीं आती। उम्मीदवार और वोटर दोनों थकने और ऊबने लगते हैं। कई-कई हफ्तों तक जरूरी सरकारी काम भी ठप्प पड़ जाते हैं। ब्रिटेन के चुनावों से क्या हम अपनी चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने की कोई तरकीब हासिल कर सकते हैं?'
'यह सही है कि ब्रिटेन की आबादी कम है, मतदाताओं की संख्या भी उस अनुपात में भारत के मुकाबले कहीं नहीं ठहरती, सुरक्षा प्रबंध भी देखना पड़ते हैं, किन्तु प्रश्न उठता है कि अपने लोकतंत्र के परिपक्व होने का प्रमाण हम कब दे पाएंगे?'
(देशबन्धु में 14 मई 2014 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2015/05/blog-post_14.html