ललित सुरजन की कलम से कांग्रेस के शुभचिंतक (!)
'पिछले तीन माह के दौरान कांग्रेस के अनेक नेताओं ने परस्पर विरोधी बयान दिए।;
'पिछले तीन माह के दौरान कांग्रेस के अनेक नेताओं ने परस्पर विरोधी बयान दिए। उनसे अनुमान होता है कि पार्टी के वर्तमान हालात में कई नेता स्वयं को असुरक्षित और असहज महसूस कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर वे हैं जो पहले से ही अपनी वाचालता एवं अतिशयोक्तिपूर्ण बयानों के लिए विख्यात या कुख्यात रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि कांग्रेस की दुर्गति के लिए ये लोग कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं। आज यदि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इन नेताओं से अप्रसन्न है और उन्हें पहले की तरह भाव नहीं दे रहा है तो इसे देर आयद दुरुस्त आयद ही मानना होगा। हां! यदि ये स्वनामधन्य नेता किसी तरह बाहर जाने का रास्ता खोज रहे हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। आखिरकार यह उनके राजनीतिक भविष्य का प्रश्न है।'
'यह तो उन नेताओं की बात हुई जो फिलहाल पार्टी में रुके हुए हैं, लेकिन ऐसे पार्टी सदस्यों की भी कमी नहीं है, जो या तो दलबदल कर रहे हैं या उसकी धमकी दे रहे हैं। इसमें भी न तो कोई आश्चर्य की बात है और न सुख-दुख मनाने की।'
(देशबन्धु में 17 सितम्बर 2014 को प्रकाशित)
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