ललित सुरजन की कलम से - जेम्स बॉन्ड की राजनीति
'जेम्स बॉन्ड की फिल्मों की निरंतर लोकप्रियता का रहस्य इन सूत्रों में खोजा जा सकता है। एक तो चूंकि नायक लगातार बदलते रहे हैं इसलिए दर्शकों को यह उत्कंठा बनी रहती है कि देखें, यह नया हीरो पुराने हीरो के मुकाबले कहां ठहरता है;
'जेम्स बॉन्ड की फिल्मों की निरंतर लोकप्रियता का रहस्य इन सूत्रों में खोजा जा सकता है। एक तो चूंकि नायक लगातार बदलते रहे हैं इसलिए दर्शकों को यह उत्कंठा बनी रहती है कि देखें, यह नया हीरो पुराने हीरो के मुकाबले कहां ठहरता है!
फिर इसी को लेकर बहस होती है कि कोनेरी ज्यादा अच्छा हीरो था या रोज़र मूर या पियर्स ब्रेसनान। जब 'एम' के रोल में पुरुष के बजाय एक स्त्री याने जूडी डेंच आ गई तो उससे भी फिल्म की संरचना पर काफी असर पड़ा।
'एम' की सचिव मनी पैनी का चरित्र भी अभिनेत्री के साथ-साथ बदलता गया है। एक तरफ फिल्म की पटकथा राजनीतिक घटनाचक्र को ध्यान में रखकर बदलती रही है तो दूसरी तरफ जासूसी के उपकरण भी समय के साथ बदल गए हैं।
शुरू का जेम्स बॉन्ड अपनी पिस्तौल और कम जटिल उपकरणों के साथ मिशन पर चल पड़ता है। वहीं बाद की फिल्मों में एक से एक अजूबे देखने मिलते हैं। एक फिल्म में तो ऐसी कार है जो किसी को दिखाई नहीं देती। स्वयं जेम्स बॉन्ड ऐसे हैरतअंगेज कारनामे करता है, जो सामान्यबुद्धि, तर्क और वैज्ञानिक दृष्टि किसी पर भी ठीक नहीं उतरते, लेकिन इनसे फिल्म का रोमांच निश्चित रूप से बना रहता है।'
(देशबन्धु में 15 नवम्बर 2012 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2012/11/blog-post_15.html