फीफा वर्ल्ड कप 26: कौन बनेगा चैंपियन!
11 जून से शुरू होने जा रहा फीफा विश्व कप फुटबॉल 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक है।;
- मिज़ार् ज़ाहिद बेग
विश्व कप का इतिहास बताता है कि पूर्वानुमान अक्सर मैदान पर बदल जाते हैं। इस तेज तर्रार टीम गेम में किसी एक प्लेयर की पल भर की सुस्ती चैंपियन टीम को भी पराजय के गर्त में धकेल सकती है। यही अनिश्चितता फुटबॉल को दुनिया का सबसे रोमांचक खेल और फीफा विश्वकप फुटबॉल को दुनिया का सबसे रोमांचक खेल आयोजन बनाती है।
11 जून से शुरू होने जा रहा फीफा विश्व कप फुटबॉल 2026 कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार तीन मेज़बान देश- अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको विश्व के सबसे लोकप्रिय खेल फुटबॉल के इस बहुप्रतीक्षित महाकुंभ की मेजबानी कर रहे हैं। 39 दिनों तक चलने वाले इस वर्ल्ड कप में पहली बार 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं जिन्हें 12 समूहों में विभाजित किया गया है। 104 मैचों बाद दुनिया को फुटबॉल का नया चैंपियन मिलेगा। सारी दुनिया के खेल प्रशंसकों के बीच इस समय सबसे चर्चित सवाल है- विश्व फुटबॉल का अगला शहंशाह कौन! वह कौन खुशनसीब कप्तान होगा जो 19 जुलाई को वर्ल्ड कप अपने हाथों में थाम कर चूमेगा?
अगर हम पिछले कतर वर्ल्ड कप 2022 के बाद के चार वर्षों पर नज़र डालें तो विश्व फुटबॉल का शक्ति-संतुलन कुछ हद तक बदलता दिखा है। यूरो 2024 में स्पेन का दबदबा, अर्जेन्टीना की निरंतरता, फ्रांस की गहराई और ब्राजील में इटेलियन कोच कार्लो एंचेलोटी के आगमन ने टूर्नामेंट को नया रूप दे दिया है। यूं चमत्कारिक उलट फेरों की संभावना हमेशा बनी रहती है फिर भी उपलब्ध फॉर्म, स्क्वाड डेप्थ, कोचिंग और बड़े मैचों के अनुभव के आधार पर चार टीमें सेमीफाइनल की सबसे मजबूत दावेदार प्रतीत होती हैं।
इनमें पहला नाम स्पेन का है। यूरोपीय चैंपियन स्पेन के पास युवा ऊर्जा और सामरिक परिपक्वता का अद्भुत मिश्रण है। कोच लुईस डेला फुएंत के प्रशिक्षण में युवा लामिन यामाल, पेड्री, निको विलियम्स, डैनी ओल्मो और रोड्री जैसी धुरी उन्हें टूर्नामेंट की सबसे संतुलित टीम बनाती है। पिछले दो वर्षों में स्पेन ने जिस निरंतरता से शीर्ष टीमों को हराया है, उससे वह खिताब की सबसे प्रबल दावेदार बनती है।
दूसरी दावेदार अर्जेन्टीना है। मौजूदा विश्व चैंपियन टीम में लियोनेल मेसी भले करियर के अंतिम चरण में हों, लेकिन जूलियन अल्वारेज़, रोड्रिगो डी पॉल, इमिलियानो मार्टिनेज एंजो फर्नांदेज़ और रोमेरो जैसे खिलाड़ियों ने टीम को नई पहचान दी है। लगातार बड़ी प्रतियोगिताओं में मिली सफलता और कोच लियोनल स्कोलानी ने अर्जेन्टीना को एक ऐसी विजेता मानसिकता दी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
तीसरा नाम फ्रांस का है। लगातार दो विश्व कप फाइनल खेलने वाली फ्रांस की टीम शायद प्रतिभा के मामले में सबसे समृद्ध है। किलियन एम्बाप्पे, एंटोन ग्रेजमैन, त्चुआ मेनी, कामाविंगा और डेम्बेले जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी उन्हें किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए खतरनाक बनाती है। यदि फ्रांस का मिडफ़ील्ड अपनी लय में रहा तो टीम फिर फाइनल तक पहुंच सकती है। कोच डिडिएर डेसचैम्प्स से प्रशिक्षित यह टीम चुस्ती फुर्ती और खेल कौशल के कारण अजेय सी लग रही है।
चौथी टीम हमेशा की तरह सारे भारत की हर समय सबसे पसंदीदा ब्राज़ील है। यद्यपि ब्राज़ील टीम पिछले कुछ वर्षों में अपेक्षित स्तर पर नहीं दिखी लेकिन इटेलियन कोच कार्लो एंचेलोटी के मार्गदर्शन में विनिसियस जूनियर, नेमार, राफिन्हा, एलिसन बेकर और कासेमीरो जैसी प्रतिभाओं के साथ यह टीम तेजी से पुनर्निर्माण की दिशा में बढ़ी है। यदि नेमार चोटिल नहीं हुए तो कोई आश्चर्य नहीं कि ब्राजील इस बार चैंपियन बने। हम सब जानते हैं कि वर्ल्ड कप के मैदान हमेशा ब्राज़ील के सर्वश्रेष्ठ रूप को सामने लाते हैं।
यदि व्यक्तिगत खिलाड़ियों की बात करें तो फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे टूर्नामेंट के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। गति, फिनिशिंग और बड़े मैचों में प्रदर्शन की उनकी क्षमता उन्हें गोल्डन बूट का प्रमुख दावेदार बनाती है। स्पेन के युवा लामिन यामाल पर भी दुनिया की नज़र होगी। कम उम्र में जिस परिपक्वता से उन्होंने यूरोपीय फुटबॉल पर प्रभाव डाला है, वह असाधारण है। उनकी जादुई ड्रिबलिंग और सटीक पासेस ने उन्हें कम उम्र में ही खतरनाक फुटबॉलर बना दिया है। मैदान पर विपक्षी टीम की रक्षापंक्ति में ख़ौफ का दूसरा नाम विनीसियस जूनियर ब्राज़ील की आक्रामक शक्ति का केंद्र होंगे। जबकि जूलियन अल्वारेज़ मैसी की सरपरस्ती में अर्जेन्टीना के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। नार्वे के एर्लिंग हॉलैंड पर भी सबकी नजरें होंगी वे हमेशा चमत्कारिक प्रदर्शन करते हैं उनको नज़रअंदाज़ करना किसी भी टीम को भारी पड़ेगा।
प्रत्येक विश्व कप की सबसे दिलचस्प कहानी उन खिलाड़ियों से भी बनती है जो अचानक उभरते हैं। एंड्रिक (ब्राज़ील), डेज़िरे डूए (फ्रांस), पाउ कुबार्सी (स्पेन) और अलेजांद्रो गर्नाचो (अर्जेन्टीना) जैसे युवा खिलाड़ी टूर्नामेंट की नई खोज बन सकते हैं। इनके पास प्रतिभा तो है ही, बड़े मंच पर स्वयं को स्थापित करने की भूख भी है।
हालांकि फुटबॉल केवल दिग्गजों का खेल नहीं है। पुर्तगाल, इंग्लैंड और जर्मनी जैसी टीमें किसी भी समय समीकरण बदल सकती हैं। पुर्तगाल के पास महान रोनाल्डो के नेतृत्व में ब्रूनो फर्नांडिस, वितिन्हा और राफेल लियाओ की पीढ़ी है, जबकि इंग्लैंड के पास जूड बेलिंगहैम और डेक्लान राइस जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी हैं।
गत 4 वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर मेरे आकलन में विश्व कप 2026 के संभावित सेमीफाइनलिस्ट स्पेन, अर्जेन्टीना, फ्रांस और ब्राज़ील हैं। इनमें स्पेन और फ्रांस ज़रा आगे दिखाई देते हैं पर मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा कि 19 जुलाई को ब्राजील या अर्जेन्टीना में से कोई एक वर्ल्डकप उठा ले जाए।
विश्व कप का इतिहास बताता है कि पूर्वानुमान अक्सर मैदान पर बदल जाते हैं। इस तेज तर्रार टीम गेम में किसी एक प्लेयर की पल भर की सुस्ती चैंपियन टीम को भी पराजय के गर्त में धकेल सकती है। यही अनिश्चितता फुटबॉल को दुनिया का सबसे रोमांचक खेल और फीफा विश्वकप फुटबॉल को दुनिया का सबसे रोमांचक खेल आयोजन बनाती है जहां हर मैच दूसरे मैच से अलग होता है। विश्व कप का यही रोमांच है- यहां भविष्यवाणी कभी अंतिम सत्य नहीं होती।
(लेखक फुटबॉल विशेषज्ञ हैं।)