ललित सुरजन की कलम से हनीमून के 66 दिन
'नरेन्द्र मोदी ने एबीपी चैनल को एक साक्षात्कार में कहा था कि, देश तो संविधान से चलता है, चुनाव के समय चाहे जितना उल्टा-सीधा क्यों न कहा जाए।;
'नरेन्द्र मोदी ने एबीपी चैनल को एक साक्षात्कार में कहा था कि, देश तो संविधान से चलता है, चुनाव के समय चाहे जितना उल्टा-सीधा क्यों न कहा जाए। हम यह बात संघ परिवार से जुड़े एक विचित्र व्यक्तित्व दीनानाथ बत्रा की गतिविधियों के सिलसिले में स्मरण कराना चाहते हैं।
अभी 'इंडियन एक्सप्रेस' अखबार ने काफी विस्तार में खुलासा किया है कि गुजरात सरकार ने श्री बत्रा की लिखी आठ किताबें हजारों की संख्या में छापकर विद्यार्थियों के बीच वितरित की हैं। इन पुस्तकों में भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता स्थापित करने के लिए जो विचार व्यक्त किए गए हैं वे हास्यास्पद, मूर्खतापूर्ण और अपमानजनक हैं। इसमें अमेरिका के अश्वेत अमेरिकियों को नीग्रो कहा गया है जबकि अमेरिका में यह संज्ञा वर्जित हो चुकी है।
इसी तरह स्वामी विवेकानंद के हवाले से कहा गया है कि भारत विदेशियों को अपने पैरों तले रखता है। एक अन्य पाठ में बच्चों को जन्मदिन पर केक काटने और मोमबत्ती जलाने से बरजा गया है। जाहिर है कि किसी भी सभ्य और आधुनिक समाज में इस तरह के विचार स्वीकार नहीं हो सकते। फिर भी अगर मोदीराज में श्री बत्रा जैसे लोगों को प्रश्रय मिल रहा है तो इससे चिंता उपजना स्वाभाविक है।
(देशबन्धु में 31 जुलाई 2014 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/07/66.html