ललित सुरजन की कलम से - मसीहा की तलाश?

'क्रिकेट प्रेमियों को यह प्रसंग अवश्य याद होगा। 1971 में अजीत वाडेकर की कप्तानी में भारत ने विदेश में दो टेस्ट श्रंखलाएं शानदार तरीके से जीती थीं;

By :  Deshbandhu
Update: 2026-09-29 01:16 GMT

'क्रिकेट प्रेमियों को यह प्रसंग अवश्य याद होगा। 1971 में अजीत वाडेकर की कप्तानी में भारत ने विदेश में दो टेस्ट श्रंखलाएं शानदार तरीके से जीती थीं। इस विजय के उपलक्ष्य में क्रिकेट के एक प्रमुख शहर इंदौर में किसी प्रमुख चौराहे पर क्रिकेट के बल्ले का एक विराट प्रस्तर प्रतिरूप स्थापित किया गया था। लेकिन 1974 में जब वाडेकर की ही कप्तानी में भारत इंग्लैण्ड से 3-0 से टेस्ट श्रंखला हार गया तो इंदौर की गुस्साई जनता ने विजय के उस बल्ले पर कालिख पोत दी; उधर तब की बंबई में वाडेकर के घर पर लोगों ने पथराव भी किया। आज यह ज़िक्र यह समझने के लिए कि समाज कैसे एक व्यक्ति से ढेर सारी आशाएं बांध लेता है, उसे मसीहा और भगवान तक का दज़ार् दे देता है; लेकिन जब आशाएं क्षणिक तौर पर ही सही बिखरने लगती हैं तो वही मसीहा अपमान, तिरस्कार, घृणा का पात्र बना दिया जाता है, उसकी विराट छवि धूल-धूसरित कर दी जाती है।'

(देशबन्धु में 02 मई 2019 को प्रकाशित)

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