तिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर: यहां एक दिन में 10 बार लगता है भोग, देर होने पर कमजोर हो जाती है 'रहस्यमयी प्रतिमा'
देशभर में कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां भगवान श्री कृष्ण अलग-अलग अवतारों में भक्तों के कष्टों को हरते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि केरल की धरती पर ऐसा मंदिर मौजूद है
नई दिल्ली। देशभर में कई प्राचीन मंदिर हैं, जहां भगवान श्री कृष्ण अलग-अलग अवतारों में भक्तों के कष्टों को हरते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि केरल की धरती पर ऐसा मंदिर मौजूद है, जो साल के 365 दिन दर्शन के लिए खुला रहता है और ग्रहण लगने पर भी मंदिर में पूजा-पाठ बंद नहीं होता। हम बात कर रहे हैं केरल के तिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर की।
थिरुवरप्पु बस स्टैंड के पास स्थित तिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। यह पहला मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण को दिन में 10 बार भोग अर्पित किया जाता है, और अगर भोग अर्पित करने में देरी होती है, तो भगवान की प्रतिमा पतली हो जाती है और कमर पर बंधा कमरबंध भी अपनी जगह से खिसकने लगता है। यही कारण है कि ग्रहण के समय भी भगवान को लगातार भोग लगता रहता है।
स्थानीय लोक मान्यताओं की मानें तो एक बार ग्रहण की वजह से मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे और अगले दिन सुबह जब मंदिर के कपाट खोले गए तो भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा एक दिन में ही कमजोर दिखने लगी थी और कमरबंध कमर से नीचे खिसक गया था। तब से लेकर अब तक मंदिर को रात को नौ बजे बंद किया जाता है और सुबह 2 बजे खोल दिया जाता है। भगवान को पहला भोग सुबह 3 बजे अर्पित किया जाता है।
मंदिर में कुल्हाड़ी रखने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। कुल्हाड़ी रखने के पीछे का कारण है कि अगर मंदिर और गर्भगृह के ताले किसी कारणवश नहीं खुल पाते हैं, तो कुल्हाड़ी की सहायता से ताले और दरवाजे को तोड़ा जा सके। गर्भगृह में मौजूद कृष्ण जी की प्रतिमा भी बहुत खास है, जो काले रंग की है और पीले वस्त्रों और आभूषणों से उनका शृंगार किया गया है। प्रतिमा की चार भुजाएं हैं, जो शंख और अस्त्र धारण किए हुए हैं।
माना जाता है कि यह स्वंयभू प्रतिमा पांडवों को मिली थी, जिसे उन्होंने एक संत को स्थापित करने के लिए दिया था। यह प्रतिमा भगवान के उस रूप को दिखाती है, जब उन्होंने कंस का वध किया था। कंस का वध करने के बाद श्री कृष्ण को बहुत तेज भूख लगी थी और अपनी भूख को शांत करने के लिए वे इसी स्थल पर आए थे। मंदिर के परांगण में अन्य मंदिर भी मौजूद हैं। परिसर में कोचंबलम मंदिर, शिव मंदिर, गणपति, सुबरमणियार और सास्ता के मंदिर भी मौजूद हैं।