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स्पर्श

स्पर्श

जयवंत दलवी सायंकाल की सुनहरी किरणें, अब तक ज़मीन पर उतरी नहीं थी। इस बड़े पीपल की, शाखों के बीच से, छन कर आती लग रही थी। वृक्ष के नीचे, आसमान की ओर...

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