हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का बड़ा ऐलान- बेंच नहीं तो वोट नहीं
उत्तर प्रदेश के मेरठ में हाईकोर्ट की खंडपीठ (बेंच) की स्थापना की लंबे समय से चली आ रही मांग अब नया रूप ले चुकी है;
कचहरी परिसर में भाजपा नेताओं का प्रवेश निषेध
- वकालतनामे वापस लेने का बार का फैसला
- हाईकोर्ट बेंच आंदोलन को मिला राजनीतिक रंग
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में हाईकोर्ट की खंडपीठ (बेंच) की स्थापना की लंबे समय से चली आ रही मांग अब नया रूप ले चुकी है। मेरठ बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए “बेंच नहीं तो वोट नहीं” का नारा दिया है। शहर के कई प्रमुख स्थानों पर इसी नारे वाले बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे पूरा माहौल गरमा गया है।
बार अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा के अनुसार, हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों मुकदमों की सुनवाई के लिए मेरठ में बेंच की आवश्यकता पर जोर दिया। लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। इस जवाब से अधिवक्ता समुदाय असंतुष्ट हो गया।
इसके बाद बार एसोसिएशन ने कड़ा फैसला लिया। अब शहर में बड़े-बड़े बैनर लगाए जा रहे हैं, जिन पर लिखा है- “बेंच नहीं तो वोट नहीं” और “बेंच विरोधी भाजपा के जनप्रतिनिधियों का कचहरी परिसर/प्रवेश पर पूर्णतः निषेध”। साथ ही भाजपा नेताओं के कचहरी परिसर में प्रवेश का विरोध करने का ऐलान भी किया गया है।
बार ने यह भी कहा है कि भाजपा जनप्रतिनिधियों के मामलों में वकालतनामे वापस लिए जाएंगे और भाजपा से जुड़े अधिवक्ताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। अधिवक्ताओं का कहना है कि मेरठ और आसपास के जिलों से इलाहाबाद हाईकोर्ट जाना आम लोगों के लिए महंगा और समय लेने वाला साबित हो रहा है। स्थानीय बेंच से न्याय सुलभ और सस्ता होगा।
मेरठ बार एसोसिएशन का यह आंदोलन अब राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। अधिवक्ता लगातार दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो और बड़े आंदोलन किए जाएंगे। शहर के लोग भी इस मुद्दे पर अधिवक्ताओं के साथ खड़े दिख रहे हैं।
हाईकोर्ट बेंच की मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से उठती रही है। अब मेरठ के अधिवक्ताओं ने इसे वोट से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन का और विस्तार देखने को मिल सकता है।