कानपुर में जाम में एक घंटा फंसी रही घायल सिपाही की एंबुलेंस, समय पर इलाज न मिलने से मौत

मंगलवार को प्रांशु अंबेडकरनगर से कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर और रायबरेली में अदालती समन तामील कराने के सिलसिले में निकले थे। फतेहपुर जाते समय उनके पिता भी उनके साथ हो लिए थे।;

Update: 2026-11-06 04:13 GMT

कानपुर: Kanpur road accident: उत्तर प्रदेश के कानपुर में ट्रैफिक व्यवस्था की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही के कारण 22 वर्षीय युवा सिपाही प्रांशु सचान की जान चली गई। फतेहपुर में एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए सिपाही प्रांशु को बेहतर इलाज के लिए कानपुर के एलएलआर (हैलेट) अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में भारी जाम के चलते एंबुलेंस करीब एक घंटे तक टाटमिल चौराहे पर फंसी रही। समय पर इलाज न मिलने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही सिपाही की सांसें थम गईं। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान होने वाली असुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ हादसा

मृतक सिपाही प्रांशु सचान वर्ष 2025 बैच के आरक्षी थे और वर्तमान में अंबेडकरनगर जिले की टांडा कोतवाली में तैनात थे। घाटमपुर के रहने वाले उनके पिता प्रमोद सचान ने घटना की पूरी जानकारी देते हुए बताया।  

समन तामील कराने की ड्यूटी: मंगलवार को प्रांशु अंबेडकरनगर से कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर और रायबरेली में अदालती समन तामील कराने के सिलसिले में निकले थे। फतेहपुर जाते समय उनके पिता भी उनके साथ हो लिए थे।

डंपर की टक्कर: फतेहपुर में बक्सर मोड़ के पास पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों पिता-पुत्र दूर जा गिरे।

पहिए के नीचे आए प्रांशु: बाइक के पीछे बैठे प्रांशु अनियंत्रित होकर डंपर के पिछले पहिये के नीचे आ गए, जिससे उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद चालक डंपर लेकर मौके से फरार हो गया। स्थानीय पुलिस की मदद से प्रांशु को पहले नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें कानपुर के एलएलआर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था।

मोतीझील की पदयात्रा और टाटमिल चौराहे पर लगा भीषण जाम

घायल बेटे को बचाने की उम्मीद में पिता एंबुलेंस के साथ कानपुर की ओर दौड़े, लेकिन शहर में प्रवेश करते ही उनकी गाड़ी जाम के दलदल में फंस गई। 

राजनीतिक कार्यक्रम का असर: कानपुर के मोतीझील इलाके में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक पदयात्रा चल रही थी, जिसके कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव और यातायात बाधित था।

एक घंटे तक फंसी रही एंबुलेंस: टाटमिल चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लगी थीं। पिता प्रमोद सचान ने बताया कि उनका बेटा एंबुलेंस के अंदर लगातार खून बहने से तड़प रहा था। वह खुद हाथों और गमछे से बेटे का रक्तस्राव रोकने की कोशिश कर रहे थे। पिता ने यातायात पुलिसकर्मियों और आसपास के लोगों से रास्ता देने की बार-बार गुहार लगाई, लेकिन वाहनों के भारी दबाव के कारण एंबुलेंस को निकालना नामुमकिन साबित हुआ। 

अस्पताल पहुंचते ही मौत: चौराहे पर लगभग एक घंटा फंसने के बाद जब एंबुलेंस किसी तरह एलएलआर अस्पताल पहुंची, तो डॉक्टरों ने प्रांशु को देखते ही मृत घोषित कर दिया।

राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक पक्ष

इस दर्दनाक हादसे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बयानबाजी भी शुरू हो गई है।

भाजपा की प्रतिक्रिया: भाजपा कानपुर-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने दिवंगत सिपाही के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जाम के कारण आम जनता को परेशानी होती है और प्रशासन को ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर भी पलटवार करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शनों के नाम पर दिल्ली में जो कुछ हुआ, उसे भी याद रखना चाहिए।

पुलिस प्रशासन का दावा: दूसरी ओर, एडीसीपी यातायात पूनम सिरोही ने टाटमिल चौराहे पर जाम की वजह से सिपाही की मौत होने की बात से इंकार किया है। उनका कहना है कि डीसीपी यातायात ने मामले की पूरी जांच कराई है और एंबुलेंस चालक से भी बातचीत की गई है, जिसके अनुसार उस समय वहां कोई लंबा जाम नहीं लगा था। चाहे प्रशासनिक दावे कुछ भी हों, लेकिन इस घटना ने एक होनहार युवा सिपाही की जान ले ली और सड़क सुरक्षा तथा आपातकालीन यातायात प्रबंधन पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ दिया है।

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