त्रिपुरा का उग्रवादी संगठन एनएलएफटी आत्मसमर्पण करने पर सहमत
सीमा पार से त्रिपुरा में उग्रवादी गतिविधियों में लिप्त नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एसडी) ने राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल होने तथा आत्मसमर्पण करने पर सहमति व्यक्त की है
नई दिल्ली। सीमा पार से गतिविधियों में लिप्त नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एसडी) ने राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल होने तथा आत्मसमर्पण करने पर सहमति व्यक्त की है।
गृह मंत्रालय ने यहां बताया कि आज यहां केंद्र सरकार, त्रिपुरा और नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी- एसडी) ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। समझौता ज्ञापन पर गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वोत्तर) सत्येंद्र गर्ग, त्रिपुरा के अपर मुख्य सचिव (गृह) कुमार आलोक और एनएलएफटी (एसडी) के साबिर कुमार देववर्मा और काजल देववर्मा ने हस्ताक्षर किये। संगठन के प्रतिनिधियों ने बाद में यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की।
समझौता ज्ञापन के अनुसार एनएलएफटी (एसडी) हिंसा के मार्ग को छोड़ने, मुख्यधारा में शामिल होने और भारतीय संविधान का पालन करने के लिए सहमत हो गया है। संगठन ने अपने 88 सदस्यों के हथियार सहित आत्मसमर्पण करने पर भी सहमति जताई है। आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को गृह मंत्रालय की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास योजना, 2018 के अनुसार आत्मसमर्पण लाभ दिया जाएगा। त्रिपुरा राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को आवास, भर्ती और शिक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगी। केंद्र सरकार त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों के आर्थिक विकास के संबंध में त्रिपुरा सरकार के प्रस्तावों पर भी विचार करेगी।
साबिर कुमार देववर्मा के नेतृत्व वाले एनएलएफटी-एसडी पर वर्ष 1997 से गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के अंतर्गत प्रतिबंध लगा हुआ है। यह संगठन अंतरराष्ट्रीय सीमा पार स्थित अपने शिविरों से हिंसा फैलाने जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। एनएलएफटी वर्ष 2005 से वर्ष 2015 की अवधि के दौरान 317 उग्रवादी घटनाओं को अंजाम देते हुए हिंसक कार्रवाई की, जिसमें 28 सुरक्षा बलों और 62 नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। एनएलएफटी के साथ वर्ष 2015 में प्रारंभ हुई शांति वार्ता के बाद से इस संगठन ने वर्ष 2016 के बाद कोई हिंसक कार्रवाई नहीं की है।