लहसुन-प्याज वाली अर्जी देख भड़के सीजेाई सूर्यकांत, कहा-अगली बार छोड़ेंगे नहीं, भारी जुर्माना होगा

CJI Suryakant News: सुप्रीम कोर्ट ने लहसुन-प्याज में तामसिक तत्व पर रिसर्च कराने की याचिका खारिज कर कर दी है। हालांकि, याचिका खारिज करने से पहले सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को खूब फटकार लगाई। उन्होंने याचिका को फालतू बताया और चेताया कि आगे से ऐसी याचिका लाने पर एक्शन होगा।

Update: 2026-03-09 10:12 GMT

नई दिल्ली। CJI Suryakant News: सुप्रीम कोर्ट में लहसुन-प्याज वाली याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत का माथा ठनक गया। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को लहसुन-प्याज में तामसिक तत्व की रिसर्च कराने की मांग को लेकर याचिका आई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट से रिसर्च के लिए आदेश देने की गुहार लगाई गई थी। जैसे ही सीजेआई सूर्यकांत को यह बात पता चली, वह नाराज हो गए।

उन्होंने लगे हाथ याचिकाकर्तो को चेता दिया और इस याचिका को फालतू बताया। उन्होंने इस याचिका पर सुनवाई करने से भी इनकार कर दिया और कहा कि यह याचिका दिमाग नहीं लगाने का एक बड़ा उदाहरण है। याचिकाकर्ता पर भड़कते हुए CJI ने पूछा, आधी रात को यह सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या? इसके बाद CJI की अगुवाई वाली बेंच ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताते हुए खारिज कर दिया।

लहसुन-प्याज पर याचिका

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि जैन समुदाय प्याज-लहसुन और जड़ वाली सब्जियों को तामसिक भोजन मानकर परहेज करता है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि यह मुद्दा आम है और हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट में एक तलाक का मामला भी भोजन में प्याज होने को लेकर सामने आया था. इस पर कोर्ट ने पूछा कि आप जैन समुदाय की भावनाओं को क्यों ठेस पहुंचाना चाहते हैं?

अदालत ने इस याचिका के साथ-साथ उसी वकील की दायर तीन अन्य PIL भी सुनने से इनकार कर दिया।

वो तीन याचिकाएं ये थीं-

➜शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने के निर्देश की मांग

➜संपत्तियों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करने की मांग

➜शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा को लेकर दिशानिर्देश बनाने की मांग शामिल

दिमाग न लगाने का एक और उदाहरण

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने आदेश में लिखा, यह पिटीशन दिमाग न लगाने का एक और उदाहरण है। इसमें प्रार्थनाएं साफ नहीं हैं, बेबुनियाद हैं जिसे खारिज किया जाता है। याचिका खराब ड्राफ्टिंग का भी एक उदाहरण है। सीजेआई ने आगे लिखा कि अगर पिटीशनर वकील नहीं होता तो हम उस पर बहुत भारी भरकम पेनाल्टी लगाते और तब याचिका खारिज करते। उन्होंने अपने आदेश में लिखा, “यह प्रार्थना कैज़ुअल ड्राफ्टिंग और सुप्रीम कोर्ट पर बोझ डालने का एक उदाहरण है।”

अगली बार छोड़ेंगे नहीं, भारी जुर्माना होगा

इसके साथ ही CJI ने याचिकाकर्ता वकील को ताकीद किया कि अगली बार जब आप ऐसी पिटीशन फाइल करेंगे, तो उस पर बहुत भारी जुर्माना लगाया जाएगा। उन्होंने वकील को फटकार लगाते हुए कहा, तुम लोगों ने बहुत सारी ऐसी दुकानें चला रखी हैं। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका खारिज करते हुए याचिककर्ता से ये भी कहा कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार उचित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है।

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