पश्चिम बंगाल में मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध, कोलकाता में लगे 'गो बैक' के नारे और दिखाया गया काला झंडा

पश्चिम बंगाल में मुख्य चुनाव आयुक्त के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कोलकाता में प्रदर्शनकारियों ने ‘गो बैक’ के नारे लगाए और काला झंडा दिखाकर नाराजगी जताई।

Update: 2026-03-09 05:47 GMT

कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने पहुंची चुनाव आयोग की फुल बेंच को सोमवार सुबह उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गृह इलाका कालीघाट में भारी विरोध झेलना पड़ा।

​सोमवार सुबह ज्ञानेश कुमार राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के साथ कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। उनके आगमन से पहले ही प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह मंदिर के बाहर जमा हो गया। जैसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त मंदिर से बाहर निकले, प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर 'गो बैक' के नारे लगाने लगे।

​प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर था। उनका दावा है कि 'एसआइआर प्रक्रिया के नाम पर मतदाता सूची से जानबूझकर कई वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस प्रक्रिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

​इस भारी हंगामे और तनावपूर्ण माहौल के बीच ज्ञानेश कुमार ने संयम बनाए रखा। उन्होंने प्रदर्शन को लेकर मीडिया के सामने कोई भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया और पूजा के बाद चुपचाप गंतव्य के लिए रवाना हो गए। बता दें कि चुनाव आयोग की टीम आज से राज्य प्रशासन और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें शुरू करने वाली है, जिससे पहले इस विरोध प्रदर्शन ने राज्य का सियासी पारा बढ़ा दिया है।

चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बीते दिनों निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को पहले इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि वे लोगों के वोट से प्रधानमंत्री बने थे, जिनके नाम निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची के SIR के दौरान मनमाने ढंग से हटाए जा रहे हैं। बनर्जी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने के लिए कहना चाहिए। बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में मध्य कोलकाता में आयोजित धरने के दौरान कहा, 'अगर मोदी 2024 में इस मतदाता सूची के आधार पर प्रधानमंत्री बन सकते हैं, तो इसमें शामिल लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल क्यों नहीं करने दिया जाना चाहिए?'

ममता ने राज्यपाल को लेकर भी उठाया सवाल

सीएम बनर्जी ने सवाल किया कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पांच मार्च को अचानक इस्तीफा क्यों देना पड़ा। उन्होंने कहा, 'इसकी जांच होनी चाहिए, उनके कार्यकाल के अभी तीन साल बाकी थे। उन्हें उस दिन बागडोगरा में राष्ट्रपति का स्वागत करना था। क्या उन्हें अचानक दिल्ली बुलाया गया और इस्तीफा देने को कहा गया?'

मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि क्या मोदी सरकार इस पद पर 'हां में हां मिलाने वाले' व्यक्ति को बैठाना चाह रही है। यह भी सवाल किया कि पश्चिम बंगाल के पूर्व में राज्यपाल रहे उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पिछले साल जुलाई में अपने पद से इस्तीफा क्यों दिया था। उन्होंने कहा कि क्या इस मामले की जांच होनी चाहिए?

Tags:    

Similar News