ईरान युद्ध पर राज्यसभा में बोले विदेश मंत्री जयशंकर, नागरिकों को निकालने के लिए हमारे दूतावास मुस्तैद, विपक्ष का वाकआउट

ईरान युद्ध को लेकर राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए दूतावास पूरी तरह मुस्तैद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकाला जाएगा।

Update: 2026-03-09 06:13 GMT

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का सोमवार से दूसरा चरण शुरू हो गया है। इसके भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। सत्र के पहले दिन लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ईरान जंग पर राज्यसभा में बयान दे रहे हैं। जयशंकर ने सदन में यह जानकारी दी कि भारत इलाके में सॉवरेनिटी का समर्थक है और हमारा मत है कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के जरिये तलाशा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गल्फ रीजन में एक करोड़ भारतीय रहते हैं और इनकी सुरक्षा को लेकर सीसीएस की बैठक में भी चिंता जताई गई। विदेश मंत्री ने इस युद्ध में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भारतीयों के संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमने जनवरी में ही अपने नागरिकों को आगाह किया था और कहा था कि जितनी जल्दी हो, स्वदेश लौट आएं। हमारे दूतावास ने भी एडवाइजरी जारी की थी। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरूतों के प्रति सतर्क है। सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

विदेश मंत्री के बयान के बीच विपक्ष का वॉकआउट

विदेश मंत्री एस जयशंकर के राज्यसभा में बयान के दौरान विपक्षी सदस्य हंगामा करते हुए वॉकआउट कर गए। इस पर नेता सदन जेपी नड्डा ने जमकर हमला बोला। जेपी नड्डा ने विपक्ष के व्यवहार की निंदा की और इसे गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि विदेश मंत्री सभी मुद्दों पर विस्तार से बयान देने वाले हैं, यह जानते हुए भी विपक्ष के नेता ने एक-एक बातें गिनानी शुरू कर दी। विपक्ष के नेता शॉर्ट डिस्कशन की डिमांड कर रहे थे और सच तो यह है कि इनका भरोसा डिबेट में है ही नहीं। जब तक मोदी जी हैं, इनको वहीं बैठना है।

'ईरान के 3 जहाज हिंद महासागर में थे, हमने एक को शरण दी'

विदेश मंत्री ने सदन में कहा कि ईरान में भारतीय छात्रों को दूतावास से मदद मिली। ईरान से लोगों को अर्मेनिया के रास्ते निकाला गया। भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब और कतर के नेतृत्व से बात की है। मैंने ईरान के विदेश मंत्री से 28 फरवरी और पांच मार्च को बात की है। विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान के तीन जहाज हिंद महासागर में थे। हमने एक जहाज को ईरान के निवेदन पर डॉकिंग की परमिशन दी, शरण दी। इसके लिए ईरान ने धन्यवाद भी कहा है। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हम सतर्क हैं। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत शांति के समर्थन में है। हम नागरिकों की सुरक्षा के पक्ष में हैं।

'भारतीयों की सुरक्षा के लिए जारी की गई कई बार चेतावनी'

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया संकट पर जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई चेतावनी और सलाह जारी की गई हैं। जयशंकर ने बताया 14 जनवरी को दूसरी चेतावनी जारी की गई, जिसमें भारतीय नागरिकों से यात्रा से बचने की सलाह और भी सख्त शब्दों में दी गई।

इसी दिन मुंबई के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने भारतीय समुद्री कर्मियों के लिए अपनी चेतावनी जारी की और उन्हें दूतावास की सलाह का पालन करने तथा जहाजों की अनावश्यक गतिविधियों से बचने का निर्देश दिया। भर्ती और शिपिंग कंपनियों से कहा गया कि वे भारतीय समुद्री कर्मियों को ईरान भेजने या नियुक्त न करें।

उन्होंने आगे बताया हमारी स्थिति का आकलन करते हुए भारतीय दूतावास, तेहरान ने 14 फरवरी को एक और सलाह जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों, छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों से ईरान छोड़ने के लिए सभी उपलब्ध परिवहन साधनों का उपयोग करने और किसी भी सहायता के लिए दूतावास से संपर्क करने का निर्देश दिया गया। 24×7 मदद भी उपलब्ध कराई गई।

यह सलाह 23 फरवरी को एक बार फिर सख्त शब्दों में दोहराई गई। कई लोग इन चेतावनियों का पालन कर देश छोड़ चुके हैं, लेकिन कई अन्य अभी भी ईरान और इराक में हैं। हम अपने मछुआरों के संपर्क में भी हैं, जो इराक से काम कर रहे हैं। यह स्थिति 28 फरवरी 2020 तक बनी रही।

'भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि'

विदेश मंत्री ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया संकट पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिति गंभीर है और सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इस संघर्ष ने अन्य देशों में भी तबाही और आतंक फैला दिया है। पूरे क्षेत्र में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, कुछ जगहों पर पूरी तरह ठप हो गई हैं।

जयशंकर ने बताया कि इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक हुई। बैठक में ईरान पर हवाई हमले और खाड़ी के कई देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस ने क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।

विदेश मंत्री ने कहा "सरकार संघर्ष के शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया में स्थिति का निरंतर मूल्यांकन कर रही है। हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं कि वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जाए।" विदेश मंत्री ने सदन से यह भी साझा किया कि भारत की विदेश नीति क्षेत्रीय शांति बनाए रखने और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय है।

पीएम लगातार पश्चिम एशिया की स्थिति पर कर रहे निगरानी'

विदेश मंत्री जयशंकर ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर बयान देते हुए कहा प्रधानमंत्री लगातार उभरती घटनाओं पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और संबंधित मंत्रालय प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। जयशंकर ने सदन को भरोसा दिलाया कि भारत की विदेश नीति क्षेत्रीय घटनाओं पर सतर्क प्रतिक्रिया देने और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय है।

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