कूनो में खुशखबरी: मादा चीता ज्वाला ने दिए पांच शावकों को जन्म, तीसरी बार बनी मां; भारत में संख्या पहुंची 53
मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई, जिसे प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
भोपाल। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी खुशखबरी सामने आई है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है। ज्वाला तीसरी बार मां बनी है और उसके इन नए शावकों के साथ कूनो में चीता परिवार और भी बड़ा हो गया है।
पांच शावकों के जन्म के बाद भारत में जन्मे स्वस्थ चीतों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। यह भारत की धरती पर चीतों का दसवां सफल जन्म समूह है, जिसे प्रोजेक्ट चीता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
पहली बार (पिछले करीब 100 सालों में) देश में चीतों की संख्या 50 के पार चली गई है। एक और खास बात यह है कि इनमें से 33 'देसी' चीते हैं यानी कि इनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है।केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को खुशखबरी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नाम्बियाई मादा चीता ज्वाला तीसरी बार मां बनी है। इस बार उसने 5 शावकों को जन्म दिया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में अब अब कुल 53 चीते हो गए हैं, जिनमें से 33 का जन्म भारत में हुआ है।
दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला स्थलीय जीव चीता करीब 7 दशक पहले भारत से विलुप्त हो गया था। सितंबर 2022 में केंद्र सरकार नामीबिया से 8 अफ्रीकी चीते लेकर आई, जिन्हें पीएम मोदी ने कूनो में प्रवेश कराया था।पिछले वर्ष कूनो में 12 शावकों का जन्म हुआ था, जिनमें से तीन शावकों सहित छह चीतों की मौत हो गई। इस वर्ष 7 फरवरी से 9 मार्च के बीच अलग-अलग समूहों में 14 शावकों का जन्म हुआ है।
2023 से अब तक कूनो में कुल 44 शावकों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 33 जीवित हैं। नामीबिया से लाई गई ज्वाला और आशा, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई गामिनी, वीरा और निर्वा और भारत में जन्मी मुखी ने उद्यान में शावकों को जन्म दिया है।
हाल ही में बोत्सवाना से लाए गए थे 9 चीते
इसी साल 28 फरवरी को बोत्सवाना से 9 चीते लाए गए थे। यह अफ्रीका से लाया गया तीसरा दल था। यह कदम देश में चीतों की आबादी पुनर्स्थापित करने की चार वर्षीय योजना के तहत उठाया गया है। प्रॉजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने पिछले दिनों बताया था कि तीन चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य स्थानांतरित किया गया है, जबकि शेष चीते कूनो में ही रखे गए हैं।
पर्यावरण मंत्री ने क्या कहा?
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'यह प्रोजेक्ट चीता के लिए गौरव का क्षण है क्योंकि नामीबियाई चीता 'ज्वाला' तीसरी बार मां बनी। उसने आज कूनो नेशनल पार्क में पांच शावकों को जन्म दिया। इसके साथ, भारत में जन्मे शावकों की संख्या 33 हो गई है। यह भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।'
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि पशु चिकित्सकों, क्षेत्रीय कर्मियों और इसमें शामिल सभी लोगों की समर्पित कोशिशों, हुनर और प्रतिबद्धता को दिखाती है। उन्होंने कहा, 'इन शावकों के आने के साथ, भारत में चीतों की कुल आबादी अब 53 हो गई है। वन्यजीव संरक्षण के लिए यह एक ऐतिहासिक और दिल को छू लेने वाला पल है।' यादव ने कहा, ''ज्वाला और उसके शावक मजबूत बनें तथा आगे बढ़ें, भारत में चीतों की कहानी को और भी ऊंचाइयों तक ले जाएं।' मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी चीतों के जन्म पर खुशी जाहिर की है।