MS धोनी ने रोहित- विराट के 2027 विश्व कप खेलने पर दिया स्पष्ट संदेश, T 20 World Cup को लेकर कही यह बात
पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। “यह स्पष्ट होना चाहिए कि सबके साथ एक जैसा व्यवहार किया जाएगा। किसी को विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन किसी के साथ अन्याय भी नहीं होना चाहिए।”
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर बेबाक राय दी है। एक साक्षात्कार के दौरान 2027 वनडे विश्व कप में रोहित और विराट की संभावित भागीदारी पर सवाल पूछे जाने पर धोनी ने साफ कहा कि उम्र को मापदंड नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी खिलाड़ी का भविष्य तय करने का अधिकार बाहरी लोगों के पास नहीं, बल्कि स्वयं खिलाड़ी और चयन प्रक्रिया के पास होना चाहिए।
‘क्यों नहीं खेल सकते?’—धोनी का सीधा सवाल
जब उनसे पूछा गया कि क्या रोहित शर्मा और विराट कोहली 2027 का वनडे विश्व कप खेल पाएंगे तो धोनी ने पहले हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी—“माफ कीजिए, सवाल क्या है?” इसके बाद उन्होंने गंभीर होते हुए कहा, क्यों नहीं? किसी को विश्व कप क्यों नहीं खेलना चाहिए? धोनी ने स्पष्ट किया कि उनके लिए उम्र कोई निर्णायक कारक नहीं है। मेरे लिए प्रदर्शन और फिटनेस ही मापदंड हैं। अगर कोई खिलाड़ी फिट है अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और देश के लिए खेलने की भूख रखता है, तो उसे रोकने का सवाल ही नहीं उठता।।
‘सबके साथ समान व्यवहार जरूरी’
पूर्व कप्तान ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। “यह स्पष्ट होना चाहिए कि सबके साथ एक जैसा व्यवहार किया जाएगा। किसी को विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन किसी के साथ अन्याय भी नहीं होना चाहिए।” उन्होंने अपने करियर का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था, तब वह 24 वर्ष के थे। “तब किसी ने मुझे कुछ नहीं कहा। अब अगर कोई खिलाड़ी 10 या 20 साल से देश के लिए खेल रहा है, तो किसी को उसकी उम्र का हवाला देकर फैसला सुनाने की जरूरत नहीं है।”
फैसला खिलाड़ियों पर छोड़ने की वकालत
धोनी ने साफ शब्दों में कहा कि रोहित, विराट या आने वाले वर्षों में उभरने वाले किसी भी खिलाड़ी के बारे में यह तय करना हमारा काम नहीं है कि वे अगला विश्व कप खेलेंगे या नहीं। “यह उनका काम है। अगर वे अच्छा खेलते रहते हैं, फिट रहते हैं और देश के लिए योगदान देना चाहते हैं, तो वे क्यों नहीं खेल सकते?”। धोनी का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्रिकेट जगत में रोहित और विराट की उम्र को लेकर चर्चाएं तेज हैं। 2027 विश्व कप तक दोनों खिलाड़ी अपने करियर के अंतिम पड़ाव के करीब होंगे, लेकिन धोनी का मानना है कि अनुभव और निरंतर प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अनुभव बनाम युवा ऊर्जा की बहस
क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच अक्सर यह बहस होती रही है कि बड़े टूर्नामेंट में युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए या अनुभवी खिलाड़ियों को। धौनी ने इस बहस पर अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि अनुभव और फिटनेस का संतुलन ही टीम को मजबूत बनाता है। उनका मानना है कि अगर कोई खिलाड़ी टीम के लिए मूल्य जोड़ रहा है, तो सिर्फ उम्र के आधार पर उसे बाहर करना सही नहीं होगा।
टी-20 विश्व कप पर भी जताया भरोसा
साक्षात्कार में धौनी ने आगामी टी-20 विश्व कप को लेकर भी भारतीय टीम की संभावनाओं पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सूर्यकुमार यादव की अगुआई वाली टीम दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में से एक है। “एक अच्छी टीम में जो कुछ भी होना चाहिए, वह सब इसमें मौजूद है। खासकर इस प्रारूप में खेलने का व्यापक अनुभव टीम के पास है,” धौनी ने कहा।
‘भूमिका स्पष्ट हो, चोट से बचें खिलाड़ी’
धोनी ने टीम की सफलता के लिए दो अहम बातों पर जोर दिया-खिलाड़ियों की फिटनेस और उनकी भूमिका की स्पष्टता। “किसी भी खिलाड़ी को चोट नहीं लगनी चाहिए। खिलाड़ियों को जो भी भूमिका दी जाए, उन्हें उसे बखूबी निभाना चाहिए।”। उनके मुताबिक, टी-20 प्रारूप में रणनीति, लचीलापन और स्पष्ट जिम्मेदारियां टीम को बढ़त दिलाती हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय टीम इन सभी मानकों पर खरी उतरती है।
धोनी के बयान का महत्व
धोनी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने 2007 टी-20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े खिताब जीते। उनकी राय को क्रिकेट जगत में गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे में रोहित और विराट के समर्थन में दिया गया उनका बयान उन चर्चाओं को नया आयाम देता है, जो उम्र बनाम प्रदर्शन के मुद्दे पर चल रही हैं।
प्रदर्शन ही अंतिम कसौटी
महेंद्र सिंह धोनी का संदेश स्पष्ट है कि किसी खिलाड़ी के करियर का फैसला उसकी उम्र नहीं बल्कि उसका प्रदर्शन और फिटनेस तय करता है। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के संदर्भ में उन्होंने यह संकेत दिया है कि जब तक वे टीम के लिए योगदान दे सकते हैं, तब तक उन्हें अवसर मिलना चाहिए। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आने वाले वर्षों में दोनों दिग्गज किस तरह अपनी फिटनेस और फॉर्म को बनाए रखते हैं। लेकिन फिलहाल, धोनी ने एक बात साफ कर दी है कि विश्व कप खेलने या न खेलने का फैसला खिलाड़ियों पर छोड़ देना ही बेहतर है।