28 करोड़ रुपए के चावल घोटाले में एफसीआई के तीन अधिकारियों समेत आठ आरोपियों पर केस दर्ज
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के तीन अधिकारियों और पांच अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दिल्ली क्षेत्र से गुवाहाटी स्थित नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड ( एनईआरएएमएसी) को चावल की बिक्री में अनियमितताएं की गईं। इससे एफसीआई को लगभग 28.87 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।;
नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के तीन अधिकारियों और पांच अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दिल्ली क्षेत्र से गुवाहाटी स्थित नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड ( एनईआरएएमएसी) को चावल की बिक्री में अनियमितताएं की गईं। इससे एफसीआई को लगभग 28.87 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
सीबीआई अधिकारी ने एक बयान में कहा कि जांच एजेंसी ने सरकारी कर्मचारियों और राइस मिलर्स व एग्रो-प्रोडक्ट कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को चावल की अनियमित बिक्री के मामले में आरोपी बनाए गए लोगों में कुन्हीरामन पद्मिनी आशा (तत्कालीन महाप्रबंधक, एफसीआई, दिल्ली क्षेत्र), ब्रह्म प्रकाश (तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक (बिक्री), एफसीआई) और अमरेंद्र विक्रम (तत्कालीन प्रबंधक (बिक्री), एफसीआई, दिल्ली क्षेत्र) शामिल हैं।
27 अगस्त को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में शामिल अन्य लोगों में भास्कर बरुआ (तत्कालीन प्रबंध निदेशक, एनईआरएएमएसी, गुवाहाटी), अंजन कुमार दत्ता (तत्कालीन अतिरिक्त महाप्रबंधक, एनईआरएएमएसी, गुवाहाटी) और दिलीप साहा (तत्कालीन उप प्रबंधक (कृषि-व्यवसाय), एनईआरएएमएसी शामिल हैं।
सीबीआई ने बताया कि एफआईआर में नामित निजी कंपनियों और उनके अधिकारियों में राजेश बजाज (उत्पलक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और दिबेश कमर्शियल्स प्राइवेट लिमिटेड, गुवाहाटी के निदेशक) और पंकज सराफ (सुपर ग्रेन्स, कोलकाता के पार्टनर) शामिल हैं।
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की शिकायत के बाद एक जांच समिति बनाई गई थी। यह समिति 10 जुलाई, 2025 की नीति का उल्लंघन करते हुए 'ओपन मार्केट सेल स्कीम' के तहत 'राज्य सरकार/राज्य सरकारों के निगमों को चावल की बिक्री' श्रेणी में एफसीआई, दिल्ली क्षेत्र द्वारा एनईआरएएमएसी को चावल के आवंटन की जांच करने के लिए गठित की गई थी।
उक्त रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि एफसीआई, दिल्ली क्षेत्र ने एनईआरएएमएसी को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था, जिसमें से एनईआरएएमएसी ने अप्रैल 2026 में ओएमएसएस(डी) के तहत 23,200 रुपए प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर लगभग 50,645 मीट्रिक टन चावल उठाया था।
आरोप था कि चावल की प्रचलित आरक्षित कीमत 28,900 रुपये प्रति मीट्रिक टन (2,890 रुपए प्रति क्विंटल) थी। ओएमएसएस(डी) 2025-26 पॉलिसी के क्लॉज के अनुसार, एनईआरएएमएसी भारत सरकार के स्वामित्व वाला उद्यम होने के कारण, ई-नीलामी के बिना चावल के आवंटन के लिए पात्र नहीं था। केवल राज्य सरकारें और राज्य सरकारों के निगम ही ई-नीलामी के बिना चावल के आवंटन के लिए पात्र थे।
आरोप लगाया गया कि चावल के आवंटन के लिए भुगतान विभिन्न निजी संस्थाओं के माध्यम से किया गया, जो या तो मिलर थे या चावल के थोक व्यापारी थे। ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं था जिससे यह पता चले कि चावल का वितरण बताए गए उद्देश्य के लिए किया गया था।
आरोप लगाया गया कि यदि एनईआरएएमएसी द्वारा रियायती कीमत पर उठाई गई मात्रा को 28,900 रुपए प्रति मीट्रिक टन की आरक्षित कीमत पर नीलामी में बेचा गया होता, तो एफसीआई को 28.87 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि प्राप्त होती।
सीबीआई की एफआईआर में कहा गया है कि पीसी एक्ट, 1988 की धारा 17 ए के तहत सक्षम अधिकारियों द्वारा कुन्हीरामन पद्मिनी आशा, ब्रह्म प्रकाश, अमरेंद्र विक्रम, भास्कर बरुआ, अंजन कुमार दत्ता और दिलीप साहा के संबंध में पूर्व मंजूरी दे दी गई है।