सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ीं, एनसीएलटी ने 6.25 करोड़ की रीपेमेंट योजना पर लगाई रोक, अब फिर होगी सुनवाई

सुभाष चंद्रा की निजी दिवाला प्रक्रिया में NCLT ने 25 अगस्त के फैसले पर रोक लगा दी है। 6.25 करोड़ की रीपेमेंट योजना पर अब पांच सदस्यीय पीठ दोबारा सुनवाई करेगी।;

Update: 2026-09-01 06:22 GMT
नई दिल्ली। जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की निजी दिवाला प्रक्रिया से जुड़े मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने अहम आदेश दिया है। पांच सदस्यीय पीठ ने 25 अगस्त को दिए गए पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। पीठ के मुताबिक, मामले में स्पष्ट बहुमत नहीं बन सका था, इसलिए अब पूरी प्रक्रिया की नए सिरे से सुनवाई की जाएगी।

एनसीएलटी ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। साथ ही सुभाष चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य व्यक्ति के नाम करने या उससे अलग करने से रोक दिया गया है।

6.25 करोड़ रुपये की थी रीपेमेंट योजना

मामला सुभाष चंद्रा की ओर से पेश की गई रीपेमेंट योजना से जुड़ा है। यह योजना इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की ओर से दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) की धारा 95 के तहत शुरू की गई निजी दिवाला कार्यवाही के दौरान सामने आई थी।

प्रस्ताव के तहत चंद्रा ने लेनदारों को 6.25 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी। इसके अलावा दिवाला प्रक्रिया की लागत के लिए 25 लाख रुपये अलग रखने की बात कही गई थी। वहीं, स्वीकार किए गए दावों की कुल राशि करीब 22,006.57 करोड़ रुपये थी।

दो सदस्यीय पीठ में नहीं बनी सहमति

इस मामले की शुरुआती सुनवाई एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ ने की थी। न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी की राय अलग-अलग थी।

भारद्वाज योजना को उन लेनदारों तक सीमित रखते हुए मंजूरी देने के पक्ष में थे, जिन्होंने इसका समर्थन किया था। दूसरी ओर, पुरी ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की प्रक्रिया में गंभीर खामियां बताते हुए योजना को खारिज करने की राय दी थी। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा के पास भेजा गया।

25 अगस्त के आदेश के बाद फिर फंसा मामला

25 अगस्त को निलेश शर्मा ने रीपेमेंट प्लान को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया था। उन्होंने कुछ दावों को योजना से बाहर रखने और उनकी राशि योग्य लेनदारों के बीच बांटने का निर्देश भी दिया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि मंजूर योजना आईबीसी की धारा 115 के तहत सभी लेनदारों पर लागू होगी, भले ही उन्होंने योजना का विरोध किया हो।

लेकिन तीनों सदस्यों की राय एक जैसी नहीं थी। इसी वजह से 31 अगस्त को मामला फिर पेचीदा हो गया और इसे एनसीएलटी अध्यक्ष के पास भेजा गया। अध्यक्ष ने अब पांच सदस्यीय पीठ का गठन किया है, जो पूरे मामले की दोबारा सुनवाई करेगी।

अब आगे क्या होगा?

नई पांच सदस्यीय पीठ पूर्व आदेश की समीक्षा करते हुए रीपेमेंट प्लान, लेनदारों के दावों और दिवाला प्रक्रिया में अपनाई गई कार्यवाही पर नए सिरे से विचार करेगी। फिलहाल सुभाष चंद्रा के लिए राहत योजना को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में 6.25 करोड़ रुपये की पेशकश के आधार पर दिवाला प्रक्रिया से बाहर निकलने का रास्ता फिलहाल अटक गया है।

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