CJP ने सुप्रीम कोर्ट में वापस लिया 5 सितंबर का मार्च, सरकार के आश्वासन के बाद बदला फैसला

सुनवाई के दौरान CJP के को-कन्वीनर सौरव दास ने संगठन की ओर से अदालत को बताया कि सरकार की तरफ से मिले सकारात्मक भरोसे को देखते हुए मार्च का आह्वान वापस लेना उचित समझा गया। उन्होंने कहा कि संगठन ने सरकार के आश्वासन, न्यायालय की गरिमा और मंगलवार को पारित आदेश को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।;

Update: 2026-09-01 09:22 GMT

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपने मार्च को वापस लेने का फैसला किया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान संगठन की ओर से यह जानकारी दी गई। CJP ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए मार्च वापस लेने का निर्णय लिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च फिलहाल नहीं होगा। कोर्ट में CJP की ओर से अपना रुख स्पष्ट किए जाने के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच चल रहे विवाद को बातचीत और आपसी सहमति के जरिए आगे बढ़ाने की संभावना बढ़ी है।

सुप्रीम कोर्ट में CJP ने वापस लिया मार्च का आह्वान

सुनवाई के दौरान CJP के को-कन्वीनर सौरव दास ने संगठन की ओर से अदालत को बताया कि सरकार की तरफ से मिले सकारात्मक भरोसे को देखते हुए मार्च का आह्वान वापस लेना उचित समझा गया। उन्होंने कहा कि संगठन ने सरकार के आश्वासन, न्यायालय की गरिमा और मंगलवार को पारित आदेश को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। CJP ने इससे पहले 5 सितंबर को मार्च निकालने का ऐलान किया था। संगठन के रुख में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब मामले को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत तथा न्यायिक प्रक्रिया दोनों जारी हैं।

सरकार के आश्वासन पर बनी सहमति

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के मन में यह आशंका थी कि सरकार द्वारा किए गए वादे को पूरा नहीं किया जाएगा। इसी आशंका के कारण मार्च का ऐलान किया गया था। सॉलिसिटर जनरल ने उम्मीद जताई कि अब सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारी सकारात्मक रुख अपनाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि परिस्थितियां बदलने के बाद प्रस्तावित मार्च को टाला जा सकता है। इससे संकेत मिला कि सरकार और CJP के बीच भरोसे की कमी को दूर करने की दिशा में बातचीत का रास्ता खुला है।

CJI ने दोनों पक्षों से सद्भावना दिखाने को कहा

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि दोनों पक्ष अच्छी भावना के साथ आगे बढ़ें तो पूरा मामला आसानी से सुलझाया जा सकता है। CJI की इस टिप्पणी को विवाद को टकराव के बजाय बातचीत और सहमति के जरिए सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत की ओर से दोनों पक्षों को सकारात्मक रुख अपनाने का संदेश भी इस सुनवाई का अहम हिस्सा रहा।

5 सितंबर को होना था मार्च

CJP ने पहले अपनी मांगों को लेकर 5 सितंबर को मार्च निकालने की घोषणा की थी। संगठन का कहना था कि सरकार से मिले आश्वासनों को लेकर पर्याप्त भरोसा पैदा नहीं हुआ है। इसी वजह से आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया था। हालांकि, मंगलवार की सुनवाई के बाद संगठन ने अपना फैसला बदल दिया। CJP ने अदालत को बताया कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और कोर्ट के आदेश को देखते हुए फिलहाल मार्च वापस लेना उचित होगा।

अब बातचीत से समाधान की उम्मीद

मार्च वापस लिए जाने के बाद अब पूरे मामले में आगे की दिशा सरकार और CJP के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी। संगठन ने अपने कदम के जरिए यह संकेत दिया है कि वह सरकार के आश्वासन और न्यायिक प्रक्रिया को मौका देना चाहता है। वहीं, केंद्र की ओर से भी प्रदर्शनकारियों की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की गई है। सॉलिसिटर जनरल की टिप्पणी से स्पष्ट है कि सरकार चाहती है कि आश्वासन के बाद आंदोलनकारी टकराव का रास्ता न अपनाएं।

फिलहाल टला टकराव

CJP के मार्च वापस लेने से 5 सितंबर को होने वाले संभावित टकराव की स्थिति फिलहाल टल गई है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति की एक तस्वीर सामने आई है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन पर आगे कितना अमल होता है और CJP भविष्य में अपनी रणनीति किस तरह तय करता है। फिलहाल मंगलवार की सुनवाई के बाद संगठन ने मार्च वापस ले लिया है और मामले को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।

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