सेना प्रमुख की पाकिस्तान को चेतावनी, तय कर लो भूगोल में रहना है या इतिहास बनना है

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया है। जनरल द्विवेदी ने संकेत दिया कि अगर पाकिस्तान अपनी नीति नहीं बदलता, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।;

Update: 2026-05-16 09:38 GMT

नई दिल्‍ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर पाकिस्तान लगातार आतंकवादियों को पनाह देता रहा और भारत विरोधी गतिविधियों को समर्थन देता रहा, तो उसे यह तय करना होगा कि वह दुनिया के भूगोल का हिस्सा बनकर रहना चाहता है या फिर इतिहास का विषय बनना चाहता है। जनरल द्विवेदी ने यह टिप्पणी सेना संवाद कार्यक्रम के दौरान सिविल-मिलिट्री इंटरैक्शन में की। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। आतंकवाद के खिलाफ देश की नीति स्पष्ट है और भारतीय सेना हर चुनौती का मजबूती से जवाब देने के लिए तैयार है।

सीमा पार आतंकवाद पर बढ़ता दबाव

सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ को लेकर दबाव बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया है। जनरल द्विवेदी ने संकेत दिया कि अगर पाकिस्तान अपनी नीति नहीं बदलता, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद को केवल सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए खतरे के रूप में देखता है।

“आधुनिक युद्ध का स्वरूप बदल चुका है”

कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं रह गया है। तकनीक के बढ़ते प्रभाव के कारण साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और कॉग्निटिव डोमेन भी युद्ध के अहम क्षेत्र बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य के संघर्षों में डेटा, सूचना और तकनीकी बढ़त निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना अपनी क्षमताओं को तेजी से आधुनिक बना रही है।

सेना ने घोषित किया ‘ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी’

जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना ने वर्ष 2026-27 को ‘ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी’ के रूप में घोषित किया है। इसका उद्देश्य सेना को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना और युद्ध के दौरान रियल टाइम डेटा तथा नेटवर्क आधारित ऑपरेशन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकें सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी। भारतीय सेना इन क्षेत्रों में तेजी से काम कर रही है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

युवा पीढ़ी से सहयोग की अपील

सेना प्रमुख ने कहा कि जटिल समस्याओं का समाधान निकालने के लिए सेना युवा पीढ़ी की भागीदारी चाहती है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में बेहतर सोच रखती है और देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। उन्होंने राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की भूमिका की भी सराहना की। जनरल द्विवेदी ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देशभर में आयोजित सिविल डिफेंस अभ्यासों में NCC कैडेट्स ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ के बाद कार्यक्रम

यह सेना संवाद कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित किया गया जब हाल ही में भारत और भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ मनाई है। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की थी। भारतीय सेना की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी हमले किए गए थे। दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया था और करीब 88 घंटे तक सैन्य संघर्ष की स्थिति बनी रही।

88 घंटे तक चला था तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ यह संघर्ष दो परमाणु संपन्न देशों के बीच गंभीर टकराव के रूप में देखा गया। हालांकि बाद में 10 मई की शाम दोनों देशों के बीच सहमति बनने के बाद हालात सामान्य हुए और संघर्ष समाप्त हो गया। भारतीय सेना ने उस दौरान स्पष्ट किया था कि उसकी कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसका प्राथमिक उद्देश्य है।

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